दिसम्बर १३, २०१८
लापता सन्यासी और गंगा कार्यकर्ता गोपाल दासकी मांने नदीके संरक्षणके लिए एक कडे विधानकी मांगको लेकर ऋषिकेशमें गंगा नदीके तट पर आमरण अनशन आरम्भ किया है । शकुंतला देवीने बुधवार, १२ दिसम्बरको त्रिवेणी घाटपर अपना अनशन आरम्भ किया । उन्होंने कहा कि यह उनका पुत्र ही था जिसने इस ध्येयसे जुडनेके लिए उन्हें प्रेरित किया । उन्होंने त्रिवेणी घाटपर संवाददाताओंसे कहा, ‘‘अपने पुत्रकी भांति मैं भी अनशनपर बैठ रही हूं, जो तबतक चलेगा, जबतक गंगा विधान लागू नहीं कर दिया जाता । इस विधानको लागू करनेके लिए कई सन्तोंने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये ।’’ एक सप्ताहसे अधिक समयसे अपने पुत्रके ओझल (लापता) रहनेके प्रकरणसे निपटनेके ढंगको लेकर परिवाद (शिकायत) करते हुए शकुंतला देवीने आरोप लगाया कि गोपाल दासको खोजनेमें ना तो राज्य शासन और न ही केन्द्र शासन गम्भीर है । गोपाल दासने बद्रीनाथमें गंगाके जलग्रहण क्षेत्रमें खननके विरुद्ध अपना अनशन आरम्भ किया था । उन्होंने ऋषिकेशमें त्रिवेणी और बाग घाटोंपर अनशन किया था । वह पांच दिसम्बरको दून सरकारी चिकित्सिय महाविद्यालयसे ओझल (लापता) हो गये थे, जहां उन्हें चिकित्साके लिए लाया गया था ।
“कैसी विडम्बना है कि महान आर्योंकी जिस भारत भूमिपर सन्तों व उनके माता-पिताकी जय-जयकार सदा हुई है, उसी भूमिपर आज सन्तोंका ऐसा अपमान हो रहा है ! धर्मका ह्रास होनेसे हिन्दुओंकी बुद्धि तमोगुणी हो गई है, जिसके कारण उनका ध्यान मायाके अतिरिक्त कहीं नहीं जाता है ! अतः अब पुनः नवनिर्माण कर रामराज्यकी स्थापना अनिवार्य है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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