अप्रैल ११, २०१९
पाकिस्तानके सिंधमें घोटकीसे दो हिन्दू युवतियों, रीना और रवीना, जिनका कथित रूपसे अपहरण कर लिया गया और उन्हें बलपूर्वक इस्लाममें परिवर्तित कर दिया गया । इतना ही नहीं बलपूर्वक उनका विवाह उनकी आयुसे बडे मुस्लिमोंसे करा दिया गया । इस प्रकरणमें इस्लामाबाद उच्च न्यायालयमें दोनों बहनोंको अपने मुस्लिम पतियों सफदर अली और बरकत अलीके साथ रहनेका आदेश दिया है ।
समाचारके अनुसार, अपनी एक याचिकामें दोनों बहनोंने यह दावा किया था कि वे घोटकीके (सिंध) एक हिन्दू परिवारसे अवश्य हैं; परन्तु उन्होंने इस्लामिक उपदेशोंसे प्रभावित होकर अपना धर्म परिवर्तन कर लिया था ।
इस्लामाबाद उच्च न्यायालयके मुख्य न्यायाधीश अथर मिनल्लाहकी अध्यक्षतावाली एक उच्च न्यायालयकी पीठने पांच सदस्यीय आयोगके विवरण प्रस्तुत करनेके पश्चात यह निर्णय लिया, जिसमें यह जांच करनेका काम सौंपा गया था कि क्या हिन्दू बहनोंको इस्लाममें धर्मान्तरणके लिए विवश किया गया था ।
आयोगने न्यायालयको सूचित किया कि कथित चिकित्सा परीक्षणोंसे यह सिद्ध हो गया था कि दोनों युवतियां अव्यस्क नहीं थी; क्योंकि उनमेंसे एक १८ और दूसरी १९ वर्ष की थीं; इसलिए उन्हें अव्यस्क नहीं कहा जा सकता ।
“युवतीका पिता मार्गके मध्यमें बैठकर रो रहा था क्या, ऐसा एक वीडियो सामने आया था और न्यायालय कह रहा है कि युवतियां अपनी इच्छासे इस्लामिक उपदेशोंसे प्रेरित होकर अधेड आयुके व्यक्तिसे विवाह कर लिया ! पाकिस्तान समूचे विश्वको यह बताना चाहता है कि वह कितनी स्वच्छ छविका है कि वहां जितने भी धर्मान्तरण होते हैं, सब हिन्दू युवतियां अपनी इच्छासे करवाती है ? क्या अपनी इच्छासे करवाते-२ ही हिन्दू वहांपर नगण्य हो गए हैं ? इस्लामिक आतंकियोंकी हिन्दुओंके प्रति क्रूरताके आए दिन समाचार आते हैं, ऐसेमें किसीपर बल डालकर या हत्याकी चेतावनी देकर यह करवाना अत्यन्त सरल है । पाकिस्तानके इस कुकृत्योंको सामने लानेके लिए वहां सभी हिदुओंको एअत्र होना होगा और विश्वके सभी हिन्दुओंने भी इन इस्लामिक आतंकियोंके विरुद्ध आवाज मुखर करनी चाहिए ताकि वहांका जो भी हिन्दू शेष है, कमसे कम वह सुरक्षित रह सकें ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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