उमर खालिदने बनाई थी देहली ‘दंगों’की योजना कहा, “शासन मुसलमानोंके विरुद्ध है, रक्त बहाना पडेगा”
२ फरवरी, २०२२
फरवरी २०२० में देहली ‘दंगों’को लेकर ‘जेएनयू’के पूर्व छात्र उमर खालिदके बडे षड्यन्त्रको लेकर कडकडडूमा न्यायालयमें सुनवाई हुई । इस मध्य अधिवक्ताओंने उमर खालिदके विरुद्ध बडे स्तरपर प्रमाण पेश किए । इससे स्पष्ट है कि ‘वॉट्सऐप ग्रुप’पर देहलीको दहलानेकी योजना हुई थी । न्यायालयमें प्रमाणके रूपमें उस सन्देशका पटलचित्र (स्क्रीनशॉट) साझा किया गया, जिसमें लिखा है, “आग लगानेकी पूरी सिद्धता है ।” इस अवसरपर न्यायालयमें कुछ साक्षी भी प्रस्तुत किए गए । यह वे लोग थे, जो शान्तिपूर्ण प्रदर्शनका भाग बनने गए थे; किन्तु हिंसाकी जानकारी होनेपर लौट गए ।
एक व्यक्तिने वक्तव्य दिया है कि महिलाओं और पुरुषोंको लाठी, पत्थर, गैवल आदि दिए गए । यह बडे षड्यन्त्रकी पुष्टि करते हैं । शासकीय अधिवक्ताने बताया कि इस बैठकमें उमर खालिदने कहा था, “शासन मुसलमानोंके विरुद्ध है । भाषणसे कार्य नहीं चलेगा । रक्त बहाना पडेगा । अधिवक्ताने न्यायालयमें एक साक्ष्यका यह वक्तव्य पढा ।
अधिवक्ताने न्यायालयको बताया कि हमें हिंसाको रोकनेकी आवश्यकता है; किन्तु इस ‘वॉट्सऐप्प’ सन्देशमें स्पष्ट दिख रहा है कि उमर खालिद, खालिद सैफी और अन्य लोगोंकी वार्तामें ‘आग लगवानेकी पूरी सिद्धता थी ।’ गुरुवार प्रातः ११ बजेसे पुनः प्रकरणकी सुनवाई होगी ।
देशको ‘दंगों’में धकेलनेवाले उमर खालिद जैसे तथाकथित छात्रको दण्ड अवश्य ही मिलना चाहिए और इनका साथ देनेवाले अन्य आरोपियोंपर भी कठोर धाराओंके अन्तर्गत कार्यवाही होनी चाहिए । आशा है कि न्यायालय अन्य छात्रोंके लिए कठोर निर्णय सुनाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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