छात्रों में ‘जागरूकता और समझ’ विकसित करने के उद्देश्य से डीयू पाठ्यक्रम में बॉलीवुड की फिल्मों को शामिल किया गया है | (जी हाँ अभी तक आज की आधुनिक नारी सबके समक्ष आधे मीटर का वस्त्र तो पहनती ही हैं और पुरुष, मूक बधिर, अबोध , नाबालिग , वृद्धा, अपंग स्त्रीयो के ही तो बलात्कार कर रहे हैं , हमें बॉलीवुड की फिल्मों को देख कर और आधुनिक बनना जो है , यह जागरूकता और समझ तो बढ़नी ही चाहिए कि हमें पशुता की ओर कैसे बढ़ना है – तनुजा )
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के तहत दर्शन, मनोविज्ञान एवं संचार के नये फाउंडेशन कोर्स में बालीवुड की कुछ हाल की फिल्में 3 इडियट्स, चक दे इंडिया, खुदा के लिए, राक स्टार, तारे जमीं पर आदि को शामिल किया है |( देश जब नैतिकता की सारी सीमाओं को तोड़ अधः पतनकी ओर जा रहा है तो ऐसे में धर्म और नैतिक मूल्य की शिक्षा देने के स्थान पर धर्म विहीन, नीति विहीन और आचार विहीन फिल्में के बारे में पढ़ाकर उसे दिखाकर इस देश की युवा पीढी का सर्वनाश की ओर धकेलने वाले और पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को सम्मिलित करने वाले हमारे शिक्षाविद को अब हम बुद्धिवादी तो नहीं कह सकते हैं !! वे निश्चित ही धिक्कार के पात्र हैं -परात्पर गुरु – तनुजा ठाकुर)
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