१.शुभ दिनमें नए वस्त्र पहनने का कारण :
कुछ विशेष दिन जैसे त्योहारके दिन देवताके तत्त्व पृथ्वीपर प्रक्षेपित होते हैं और वे अधिक क्रियाशील भी रहते हैं | ऐसे दिवसपर नए वस्त्र पहननेसे , वस्त्र देवताके तरंगोंको ग्रहण कर लेते हैं और सात्त्विक हो जाते हैं | फलस्वरूप व्यक्तिका सूक्ष्म देह इन तरंगोंके कारण शुद्ध हो जाते हैं और वे इन्हें ग्रहण भी कर पाते हैं | ऐसे वस्त्रोंको धारण करनेसे सम्पूर्ण वर्ष उन्हें लाभ मिलता है |
२. देवताको वस्त्र अर्पण कर तत्पश्चात उसे पहननेका शास्त्र :
जब हम ईश्वरको कुछ भी अर्पण कर उसे प्रसादके रूपमें ग्रहण करते हैं, हमें उसमें निहित चैतन्यका लाभ प्राप्त होता है |
३. नए वस्त्रको धोकर पहननेका शास्त्र :
वस्त्रके निर्माण होनेकी प्रक्रियाके समय वह अनेक हाथोंसे गुजरता है | फलस्वरूप वस्त्रमें सात्त्विकता ग्रहण करनेकी क्षमता कम हो जाती है | जब उसे दुकानमें भी रखा जाता है तो भी अनेक लोग उसे स्पर्श करते हैं | इससे उसपर अनिष्ट शक्तिके आक्रमणकी संभावना बढ़ जाती है | परिणामस्वरूप ऐसे वस्त्रको पहननेवालोंको कष्ट होनेकी संभावना बढ़ जाती है
| अतः नए वस्त्रको पहननेसे पूर्व उसे धोना चाहिए |
• गंदे और पहने हुए वस्त्रको पुनः पहननेका परिणाम क्या होता है ?
• धुले हुए वस्त्र पहननेका परिणाम क्या होता है ?
• गंदे और बिना धुले हुए वस्त्र पहननेसे पूर्व उसपर इत्र डालकर पहननेका परिणाम क्या होता है?
• नए कपड़े पहनने से पूर्व उसे किसे पहनने देना चाहिए ?
उपर्युक्त प्रश्नोंके उत्तर और इस संदर्भमें और जानकारीके लिए पढ़ें:
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http://www.hindujagruti.org/hinduism/knowledge/article/why-are-new-clothes-worn-on-an-auspiscious-day.html
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