‘तबलीगी जमात और निजामुद्दीन मरकज हैं इस्लामी कट्टरपन्थके संस्थान’, विश्व हिन्दू परिषदने इन्हें प्रतिबन्धित करनेकी मांग की
१७ दिसम्बर, २०२१
१६ दिसम्बर २०२१ को विश्व हिन्दू परिषदने भारतके केन्द्र शासनसे ‘तबलीगी जमात’, ‘तबलीगियों’ व ‘इज्तिमा’पर पूर्ण प्रतिबन्धकी मांग की । ‘तबलीगी जमात’पर सऊदी अरबद्वारा लगाए गए प्रतिबन्धका भी ‘विहिप’के केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमारने स्वागत किया । इन्हें ‘इस्लामी’ आतङ्कवादका पोषक बताया ।
‘तबलीगी जमात’से सम्बन्धित अधिकोष (बैंक) खातों, कार्यालयोंको बन्द (सील) करनेकी मांग भी की है । ‘प्रेस’ विज्ञप्तिमें लिखा है कि रूसने भी इनपर प्रतिबन्ध लगाया है । ‘दारुल उलूम’, ‘पीएफआई’, ‘तबलीगी जमात’ व ‘निजामुद्दीन मरकज’ प्रतिबन्धित हों ।
‘तबलीगी जमात’का प्रारम्भ १९२६ से हुआ, तबसे यह सहस्रों लोगोंका धर्मान्तरण करवा चुके हैं । भारतके ‘मस्जिदों’, ‘मदरसों’से प्राप्त शस्त्रोंका इनसे सम्बन्ध रहा है । विश्वके सभी आतङ्की संगठनोंके जन्मदाता भी यही हैं । भारतमें स्वामी श्रद्धानंदकी हत्या, गोधरा रेलयान (ट्रेन) जलानेका षड्यन्त्र, अमेरिकाके ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’पर आतङ्कवादी आक्रमण, इन सबका सम्बन्ध ‘तबलीगी जमात’ व ‘निजामुद्दीन मरकज’से रहा है ।
‘विहिप’का कथन योग्य है । विश्वके सहस्रों आतङ्कवादी संगठनोंके जनक यही रहे हैं । सऊदी अरब व रूस इन्हें प्रतिबन्धित कर चुका है । यूरोपीय देशोंमें बढते आतङ्कवाद या कश्मीर घाटीमें होते आक्रमण, इन सबके पीछे ‘तबलीगी’, ‘दारुल उलूम’, ‘निजामुद्दीन मरकज’ और ‘पीएफआई’ही होते हैं; अतः देशमें शान्ति व्यवस्था बनाए रखनेके लिए इनपर प्रतिबन्ध अत्यावश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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