दुर्गापूजा पण्डालमें पादत्राणोंसे (जूतोंसे) शोभा (सजावट) करनेपर हिन्दूवादी सङ्गठनोंने किया विरोध
१२ अक्टूबर, २०२१
कोलकाता जनपदके दमदम ‘पार्क’ क्षेत्रके दुर्गापूजा पण्डालकी शोभा पादत्राणोंसे (जूते-चप्पलोंसे) की गई है । इस शोभाको लेकर हिन्दूवादी सङ्गठनों व ‘बीजेपी’ने विरोध व्यक्त किया है । वहीं विधानसभामें नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारीने राज्यके मुख्य सचिवसे इस प्रकरणमें हस्तक्षेप करनेका आग्रह किया है तथा षष्ठीसे पूर्व पादत्राण हटानेकी मांग की है । अपने ‘ट्विटर’ खातेके माध्यमसे शुभेंदुने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “दमदम ‘पार्क’में पूजा पण्डालको पादत्राणसे सज्जित किया गया है । कलात्मक स्वतन्त्रताके नामपर मां दुर्गाका यूं अपमान जघन्य कृत्य है ।” वहीं मेघालयके पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ ‘भाजपा’ नेता तथागत रॉयने भी, पत्रकारोंको अपने विचार साझा करते हुए अपना विरोध व्यक्त किया है और कहा कि इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं । विश्व हिन्दू परिषदद्वारा भी इन्हें हटवानेकी मांग की गई है । उनके अनुसार, जबतक पादत्राण नहीं हटाए जाते, तबतक बंगाली हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाएं शान्त नहीं होंगी । दमदम ‘पार्क’ भारत चक्र समितिके अधिकारीने अपना स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि जूते पण्डालसे दूर हैं व हमारी इस वर्षकी ‘थीम’ किसान आन्दोलन है । उनके अनुसार पण्डालमें जानेके मार्गपर जो पादत्राण लगाए लगाए गए हैं, वे आन्दोलनकारी किसानोंपर ‘पुलिस’के लाठीचार्जके प्रतीक हैं । पूजा पण्डालके मार्गमें ‘ट्रैक्टर’की प्रतिकृतिको भी दो भागोंमें दिखाया गया है एवं उसपर लगे फलकमें आंग्ल (अंग्रेजी) भाषामें लिखा है कि ‘हम किसान हैं ! आतङ्की नहीं, किसान अन्न सैनिक है ।
जब बंगालमें शासन ही धर्मद्रोहियोंका है तो लोग वहां कृत्य भी धर्म विमुख ही करेंगे । वहीं हिन्दुओंमें अपने धर्म ज्ञानका कितना अभाव है ? यह समाचार इस विषयसे भी अवगत कराता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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