श्रीगुरु उवाच


स्वार्थ तथा भोगवादका बोलबाला होनेपर तथा मानवता शब्दका अस्तित्व नष्ट होनेकी स्थिति आनेपर विद्यार्थी वनसे साधना करवा लेना ही इसपर एकमात्र उपाय है, इससे भी अज्ञात, स्वातंत्र्योत्तर कालके विविध राज्यकर्ता देनेवाला लोकतन्त्र अब और नहीं । इसके स्थानपर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करें ! –
१. डॉक्टर, अधिवक्ता (वकील), अभियन्ता, व्यापारी, पुलिस, शासकीय कर्मचारी, लोकप्रतिनिधि, मन्त्री इनका भ्रष्टाचार रोकने हेतु नियम (कानून) बनाए गए हैं; परन्तु उनमें ऐसी वृत्ति ही निर्माण न हो इस हेतु कुछ नहीं किया ।
२. नाटक, चित्रपट, दूरदर्शनके धारावाहिकों इत्यादिमें अश्लीलता दर्शानेकी अनुमति देकर समाजको नीतिशून्य किया है ।
३. राष्ट्रप्रेम जागृत न करनेवाला मिथ्या इतिहास पढाया जाता है ।
४. सर्व अपराधोंकी ओर दुर्लक्ष किया जाता है ।
५. कुटुम्बभावनाहीन, नीतिशून्य समाज तथा राष्ट्र विषयी प्रेमभावहीन राष्ट्र, रावणराज्य ही होता है । इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु रामराज्यमें करने हेतु विद्यार्थी जीवनमें साधना सिखाना तथा करवा लेना यही एकमेव उपाय है । ऐसा न करते हुए अन्य प्रयत्न करना, विष देकर जीवित रखनेके प्रयत्न करनेके समान है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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