‘मेरी गर्दन काटनेका षड्यन्त्र, हिन्दू रीतिसे हो अन्तिम संस्कार, नरसिंहानंद दें मुखाग्नि’, वसीम रिजवीने व्यक्तकी हत्याकी आशङ्का
१५ नवम्बर, २०२१
मृत्युके पश्चात ‘दफनाने’के स्थानपर जलानेकी इच्छा व्यक्तकर, उत्तर प्रदेश ‘शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड’के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी पुनः चर्चामें आ गए हैं । रिजवीने ‘वसीयत’ बनाकर मृत्युके पश्चात ‘कब्रिस्तान’में ‘दफन’ होनेके स्थानपर श्मशान घाटपर जलाए जानेकी इच्छा प्रकट की है । उन्होंने अपनी चिताको मुखाग्नि देनेका अधिकार, डासना मन्दिरके महन्त व जूना अखाडेके महामण्डलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती को दिया है । इस सन्दर्भमें रिजवीने एक दृश्यपट भी प्रस्तुत किया है ।
सार्वजनिक हो रहे अपने दृश्यपटमें वसीम रिजवीने कहा है कि देश और समूचे विश्वमें उनकी हत्याका षड्यन्त्र रचा जा रहा है और उनकी गर्दन काटनेवालेको पुरस्कार देनेकी घोषणा की गई है । वसीम रिजवीके अनुसार, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालयमें ‘कुरान’की २६ ‘आयतों’को चुनौती दी और इस्लामके ‘पैगम्बर’ मोहम्मदपर पुस्तक भी लिखी है, जिसके कारण कट्टरपन्थी उनकी हत्या करना चाहते हैं ।
वसीम रिजवीने आगे कहा, “मैंने अपने उत्तराधिकार लेखमें यह भी लिखा है कि मेरी मृत्युके पश्चात, मेरा शरीर मेरे लखनऊमें रहनेवाले हिन्दू मित्रोंको दे दिया जाए ।” उन्होंने अपनी मृत्युके पश्चात सभी लोगोंसे शान्ति बनाए रखनेकी याचना की है । विचारणीय है कि जबसे वसीम रिजवीने अपनी पुस्तकका विमोचन यति नरसिंहानंदसे करवाया है और ‘कुरान’के विरुद्ध न्यायालयमें याचिका दी है, तबसे एक विशेष वर्ग उन्हें धमकिायां दे रहा है और उनके विरुद्ध निरन्तर धरना प्रदर्शन कर रहा है ।
असत्य अधिक समयतक छुपा नहीं रह सकता है । उसकी प्रकारका यह उपरोक्त प्रकरण है, जिसमें इस्लामका अनुसरण करनेवाले ही, उसके विरुद्ध हो रहे है और सत्यका बोध होते ही, हिन्दू धर्मका (जो वास्तवमें उनका अपना है) स्मरण कर रहे है, यह शुभ संकेत हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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