दिसम्बर २४, २०१८
पश्चिम बंगालके २४ परगना जनपदके बशीरहाटमें पुलिसने सोमवार, २४ दिसम्बरको भारतीय जनता पार्टीके कार्यकर्ताओंपर लाठियां चलाईं ! ‘एएनआई’से प्राप्त चित्रमें एक पुलिसवाला एक व्यक्तिको सडकपर घसीटता हुआ दिखाई दे रहा है ! समाचारोंके अनुसार भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिसके मध्य संघर्ष उस समय हुआ, जब उच्चतम न्यायालयने बंगालमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाहकी रथयात्राको लेकर शीघ्र सुनवाई करनेको मना कर दिया । बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोषकी अध्यक्षतामें प्रदर्शन किया गया था । भाजपाने शाहकी रैलीकी याचिकाको विंटर सूचिमें सम्मिलित करनेको कहा था । गत दिवसोंमें इसी प्रकरणमें कलकत्ता उच्च न्यायालयने भाजपाकी फाइलको वापस पुनर्विचारके लिए एकल पीठके पास भेज दिया था । पीठने अमित शाहकी रैलीको स्वीकृति दे दी थी, परन्तु मुख्य न्यायाधीश देबासीश करगुप्त और जस्टिस शम्पा सरकारकी खण्डपीठने राज्य विभागद्वारा गुप्तचर सूचनाओंपर विचार करनेके लिए प्रकरणको पुनः सिंगल बेंचके पास वापस भेज दिया था ।
राज्य शासनके अधिवक्ताने खण्डपीठके समक्ष कहा था कि ३१ जनपदोंकी पुलिस और पांच आयुक्तालयसे मिली सूचनाओं वाला लिफाफा खोले बिना ही पीठने निर्णय सुना दिया था । बता दें कि ममता शासनद्वारा आशंका जताई गई है कि राज्यमें अमित शाहकी रैली होनेपर साम्प्रदायिक झडप हो सकती है ।
“पश्चिमी बंगालकी स्थिति किसीसे छिपी नहीं है कि वहां कैसे हिन्दुओंको प्रताडित किया गया है ! अब मुख्यमन्त्री किसी भी स्थितिमें हिन्दुवादी शासन अथवा हिन्दुओंका प्रवेश नहीं चाहती हैं तो हिन्दुवादी कार्यकर्ताओंको पीटा जा रहा है ! इससे उनकी हिन्दुओंके प्रति शत्रुवत नीति व रवैया उजागर होता है और भाजपा उच्च स्तरके नेता भी इसपर अपना विरोध प्रकट कर कार्यवाही करें, क्योंकि यदि कोई दल अपने कार्यकर्ताओंकी रक्षा नहीं कर सकता तो अन्य उनसे क्या आशा रखनी चाहिए ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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