जून ११, २०१८
केन्द्र सरकार जम्मू -कश्मीर जैसे अशान्त क्षेत्रोंमें ‘व्हाट्सऐप कॉलिंग’ सेवा प्रतिबन्धितकी व्यवहारिकताकी समीक्षा करेगी; क्योंकि यह पता चला है कि आतंकी सीमा पार बैठे अपने स्वामियोंसे निरन्तर सम्पर्कमें बने रहनेके लिए इस सुविधाका प्रयोग करते हैं । इतना ही नहीं घाटीमें शान्ति बिगाडनेके लिए आधुनिक सूचना तकनीकका भी खूब दुरूपयोग कर रहे हैं ।
गृह सचिव राजीव गौबाकी अध्यक्षतामें हुई एक बैठकमें इस सम्बन्धमें स्वीकृति दी । बैठकमें २०१६ में नगरोटामें सेनाके शिविरमें हुए आतंकी आक्रमणके सम्बन्धमें बन्दी बनाए गए आतंकियोंका विवरण दिया । ‘जैश-ए-मोहम्मद’के आतंकियोंने जम्मू-कश्मीर पुलिससे कहा कि वे ‘व्हाइटऐप कॉल’के माध्यमसे सीमापारसे निर्देश ले रहे थे । इस आतंकी आक्रमणमें सात सैन्यकर्मी हुतात्मा हुए थे ।
‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ने (एनआईए) तीन लोगोंको बन्दी बनाया, जिन्हें राज्य पुलिसने आतंकियोंकी सहायतामें कथित रूपसे संलिप्त होनेके लिए बन्दी बनाया था । बैठकमें ‘इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मन्त्रालय’, ‘दूरसंचार विभाग’ और साथ ही सुरक्षा विभागों एवं जम्मू-कश्मीर पुलिसके शीर्ष अधिकारी सम्मिलित हुए ।
बैठक ‘कीपैड जेहादियों’द्वारा सामाजिक प्रसार वाहनोपर प्रेषित दुर्भावनापूर्ण सामग्रीपर वार्ता करने के लिए बुलाई गई थी । ‘कीपैड जेहादी’ अफवाह फैलाकर या किसी घटनाको साम्प्रदायिक रूप देकर कानून व्यवस्था बिगाडनेके लिए अन्तर्जालपर विष फैलानेका कार्य करते हैं ।
एक आधिकारिक वक्तव्यमें कहा गया कि बैठकमें आतंकियोंसे मिलने वाली सुरक्षा चुनौतियों और साथ ही प्रसार वाहनके माध्यमसे ये ‘चाइल्ड पॉर्नोग्राफी’का प्रसार करने वालों लोगोंसे निपटनेके लिए विधि प्रवर्तन विभागोंद्वारा किए जाने वाले उपायोंपर चर्चाकी गई ।
स्रोत : जी न्यूज
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