भारतमें अशांति एवं आतंक फैलानेका कुकर्म करता रहा है, उसे अभीतक ‘एमएफएन’की (most favoured nation) सूचीमें क्योंं रखा गया था ?, यदि अब पाकिस्तानसे आयात होनेवाली वस्तुओंपर शुल्क बढाया गया तो वह सब पहले क्यों नहीं किया गया ? क्या हम इन ४४ वीरोंको खोनेका समय ताक रहे थे ?
भारत यदि चाहता तो पाकिस्तानका अस्तित्त्व बहुत पहले ही समाप्त कर चुका होता; किन्तु यहां क्षात्रवृत्तिसे शत्रुओंका संहार करनेवाले राजनेता स्वतन्त्रता पश्चात हुए ही नहीं हैं, इसीका मूल्य यह देश चुका रहा है और विश्वास मानें, अभी भी विशेष कुछ नहीं होगा, कोई छोटा-मोटा आघातकर उसे बढा-चढाकर बताया जाएगा और चुनावमें उसे सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों एक विषय बनाकर भुनानेका प्रयास करेंगे और एक माह पश्चात इस भयावह प्रकरणको अभी तकके पाकिस्तान प्रायोजित अनेक नरसंहार समान भुला दिया जाएगा ! इस देशमें छत्रपति शिवाजी महाराज, महावीर राणा प्रताप जैसे तेजस्वी राज्यकर्ता अब हैं ही नहीं ! सम्भवतः माताओंने अब ऐसे राष्ट्रनिष्ठ क्षत्रिय राज्यकर्ताओंको जन्म देना छोड दिया है या पुरुषोंके वीर्यमें वह बल नहीं रहा ! भारत माताको आज शिवाजी महाराज, राणा सांगा, जैसे सुपुत्रोंकी कमी खल रही है !
वस्तुत: जब कोई अंग नाडीव्रण (नासूर) हो जाए तो शरीर रक्षण हेतु उस अंगको काटना होता है, वैसे ही पाकिस्तान अब एक ‘नासूर’ बन चुका है, उसका नष्ट होना इस देशमें ही नहीं अपितु सम्पूर्ण एशिया महाद्वीपके हितमें है, यह समय रहते इस देशके राज्यकर्ताओंको समझमें आना चाहिए, अन्यथा भविष्यमें हमें इससे भी भारी मूल्य चुकाना पड सकता है !
Leave a Reply