जनवरी २६, २०१९
मुख्यमन्त्री योगी आदित्यानाथने अयोध्या मुद्देपर कहा कि जनताका राम मंदिरपर धैर्य तीव्रतासे समाप्त हो रहा है । यदि उच्चतम न्यायालय इस विवादपर शीघ्र निर्णय सुनानेमें असमर्थ है तो न्यायालयको यह प्रकरण हमें सौंप देना चाहिए । हम इसको २४ घंटेके भीतर सुलझा लेंगें ।
मुख्यमन्त्रीने यह भी दावा किया कि बीजेपी उत्तर प्रदेशमें आनेवाले लोकसभा मतदानमें २०१४ से अधिक सीटें जीतेगी । एक निजी दूरदर्शन वाहिनीने जब उनसे यह पूछा कि क्या वे राम मंदिरका प्रकरण वार्तासे सुलझाएंगे या फिर किसी और ढंगसे, तो इसके उत्तरमें योगी आदित्यनाथने कहा, “पहले न्यायालयको इसे हमें सौंपने दीजिए ।”
उन्होंने कहा, “मैं न्यायालयसे यह विनती करता हूं कि इसे शीघ्रातिशीघ्र निपटा दे । ३० सितम्बर २०१० को इलाहाबाद उच्च न्यायालयकी खंडपीठने केवल भूमिके विभाजनपर ही अपना निर्णय नहीं सुनाया था, वरन यह भी माना था कि बाबरी ढांचाको हिन्दू मंदिर या स्मारकको तोडनेके पश्चात उसका निर्माण किया गया था । उच्च न्यायालयके आदेशमें ‘आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’के ब्यौरेमें भी यही बात सामने आई ।”
उन्होंने आगे कहा, “निराधार स्वामित्वके अधिकारके चलते अयोध्या विवादको लम्बा खींचा जा रहा है । हम न्यायालयसे यह विनती करते हैं कि वह लाखों जनताकी संतुष्टिके लिए शीघ्रातिशीघ्र इसपर अपना निणय दें ताकि हम जनताके विश्वासका प्रतीक बन सकें; परन्तु यदि निराधार देरी होती है तो जनताका विश्वास खो जाएगा ।”
“जनताका विश्वास तो खो चुका है । न्यायालय इसपर निर्णय देगा नहीं; क्योंकि उन्हें न रामसे सरोकार है और न ही धर्मसे और न ही हिन्दुओंको न्यायालयसे कोई आशा है ! राम मन्दिर हेतु हिन्दुओंने भाजपाको सत्तासीन किया था; परन्तु हिन्दुवादी शासनका राम मन्दिरको लेकर भाव व कार्यशैली अत्यन्त निराशापूर्ण रहे हैं; अतः अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनापर ही मन्दिर निर्माण सम्भव है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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