जाकिर नाइकके संगठन ‘आईआरएफ’ पर ५ वर्षका प्रतिबन्ध, मुसलमान युवाओंको कट्टरपन्थी बनानेका आरोप
१ अप्रैल, २०२२
मुसलमान युवाओंको कट्टरपन्थी बनानेके आरोपमें, जाकिर नाइकके ‘एनजीओ इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’पर ५ वर्षका प्रतिबन्ध बढा दिया गया है । इसके पूर्व जाकिर नाइकके ‘एनजीओ’पर २०१६ में शासनने प्रतिबन्ध लगाया था, जो १७ नवम्बर २०२१ को समाप्त हो रहा था; किन्तु शासनने इसे पूर्व ही बढा दिया था । अब गृह मन्त्रालयने इसे पुनः ५ वर्षके लिए बढा दिया है । ‘फाउंडेशन’को प्रथम बार १७ नवम्बर २०१६ को अवैध गतिविधियां (रोकथाम) विधान, १९६७ के अन्तर्गत एक अवैध संगठन घोषित किया गया था ।
गृह मन्त्रालयके सूत्रोंका कहना है कि जाकिर नाइक अपने भाषणोंसे देशके मुसलमानोंको भडकानेमें लगा है और इससे देशकी सुरक्षापर भी संकट है । यद्यपि, भडकाऊ भाषणके कारणसे कई देशोंमें प्रतिबन्धित किए जानेके उपरान्त जाकिर नाइकके कई ‘वीडियो’ अभी भी अन्तर्जालपर उपलब्ध हैं । साथ ही ‘गूगल ट्रेंड’ खोजके परिणाम बता रहे हैं कि ‘यूट्यूब’पर जाकिर नाइकको खोज करनेमें जम्मू-कश्मीरके लोग सबसे आगे हैं ।
जाकिर नाईककी गतिविधियां सन्दिग्ध रही हैं, चाहे वह देश में हो या विदेशोंमें । भारत शासनको चाहिए उसके संगठनपर आजीवन प्रतिबन्ध लगाए व उसे देशमें लाकर उसके कुकृत्योंके लिए उसे दण्डित करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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