जून १८, २०१९
अमेरिकामें भारतवंशियोंकी संख्या २०१०-१७ के मध्य ३८% बढी है । २०१० में यह ३१ लाख, ८३ सहस्र, ६३ थी, जो २०१७ में बढकर ४४ लाख, २ सहस्र, ३६३ हो गई । ‘साउथ एशियन अमेरिकन लीडिंग टुगेदर’के (साल्ट) ब्यौरेमें कहा गया है कि ६ लाख ३० सहस्र भारतवंशी यहां अवैध रूपसे रह रहे हैं । इन सभी लोगोंका आज्ञापत्र (वीजा) समाप्त हो चुका है । २०१० के पश्चात अमेरिकामें अवैध रूपसे रह रहे भारतीयोंकी संख्यामें ७८% की वृद्धि हुई है ।
ब्यौरा बताता है कि दक्षिण एशियाई देशोंके लगभग ५० लाख लोग वैध रूपसे अमेरिकामें रहते हैं । २०१०-१७ के मध्य अमेरिकामें नेपालियोंकी संख्यामें सबसे अधिक २०६.६% की वृद्धि हुई है ।
‘करंट पापुलेशन सर्वे’के अनुसार २०१६ के अमेरिकी चुनावमें एशियाई देशोंके ४९.९% लोगोंने मतदान किया था । २००१ में जहां दक्षिण एशियाई मूलके मतदाताओंकी संख्या २० लाख थी, वहीं २०१६ में ये बढकर ५० लाख तक पहुंच चुके हैं । इनमेंसे १५ लाख भारतीय हैं ।
इसके अनुसार दक्षिण एशियाई देशोंके १०% लोग निर्धनतामें जीवनयापन करनेको विवश हैं । ऐसे लोगोंमें पाकिस्तानी १५.८%, नेपाली २३.९%, बांग्लादेशी २४.२% और भूटानी ३३.३% है । बांग्लादेश और नेपालके लोग अमेरिकामें सबसे अधिक बुरी स्थितिमें हैं ।
साल्टका कहना है कि अमेरिकामें शरण लेने वाले दक्षिण एशियाई देशोंके लोगोंकी संख्या गत १० वर्षोंके मध्य अधिक बढी है । यूएस इमीग्रेशन, कस्टम एनफोर्समेंट (आईसीई) विभाड इन लोगोंके विरुद्घ कार्यवाही भी करता रहता है ।
“भारतीयोंकी बढती संख्या इस बातका संकेत है कि विश्वमें सनातन धर्म पुनः प्रसारित होनेका समय निकट है । सबसे बडी बात है कि यह उन देशोंके लिए चिन्ता नहीं प्रसन्नताका विषय होना चाहिए; क्योंकि अन्य सभ्यताओंको पाशविक वृत्तिसे मनुष्यताकी ओर लानेवाला सनातन धर्म ही है और सबसे बडी बात है कि सम्पूर्ण पृथ्वीको अपना परिवार माननेवाले हिन्दू कोई आतंकवाद नहीं फैलाते हैं । वे जहां जाते हैं, वहांकी संस्कृति ही खिल जाती है । “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : भास्कर
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