जून १९, २०१९
बिहारके मुजफ्फरपुरमें एक ओर बच्चोंकी मृत्यु रूक नहीं रही है तो दूसरी ओर संसाधनोंकी न्यूनता और रोगियोंकी संख्यासे चिकित्सालय प्रशासनने भी हाथ खडे कर दिए हैं । तीमारदारोंका आरोप है कि ज्वरसे पीडित बच्चोंको मुजफ्फरपुरके श्री कृष्णा चिकित्सालय ला रहे परिजनोंको वापस लौटाया जा रहा है । बच्चोंको ‘ओआरएस’का घोल भी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है ! अबतक मुजफ्फरपुरमें ‘अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम’से ११२ बच्चोंकी मृत्यु हो चुकी है ।
बुधवार, १९ जूनको श्रीकृष्णा चिकित्सालय पहुंचे बच्चोंकी माताओंने कहा कि उनके बच्चे ज्वरसे पीडित हैं और आरोप लगाया कि उन्हें चिकित्सालयमें प्रविष्ट नहीं कराया जा रहा है । माताओंने कहा, ‘किसीने हमें ‘ओआरएस’के बारेमें हमें कुछ नहीं बताया और न ही उपलब्ध कराया । हमें ‘एईएस’के लक्षण नहीं ज्ञात हैं । हमारे बच्चे ४ से ५ दिनसे ज्वरसे तप रहे हैं । चिकित्सकने हमें बच्चोंको औषधि देनेको कहा और कहा कि इसके पश्चात भी यदि ज्वर नहीं उतरा तो प्रविष्ट कराया जाएगा । हमारे पास धन नहीं है ।’
चिकित्सालयमें मरीजके परिजनोंने बताया, ‘निरन्तर बिजली जाती रहती है । इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हैं । हम हाथसे पंखा करते हैं । गर्मीके कारण बच्चे रोने लगते हैं ।’
मुजफ्फरपुरमें चमकी ज्वर कहे जाने वाले एईएससे निरतर हो रही मौतसे व्यवस्था चरमरा गई है । इस समय मुजफ्फरपुरके एचकेएमसीएचमें इस घातक रोगके सबसे अधिक रोगी प्रविष्ट हैं । यहां ३०० से अधिक रोगियोंकी चिकित्सा चल रही है । चिकित्सालयमें पांव तक रखनेका स्थान नहीं मिल रहा है । प्रत्येक स्थानपर अफरा-तफरीका वातावरण देखनेको मिलेगा । एक ही बेडपर तीनसे चार बच्चोंकी चिकित्सा चल रही है । परिजनोंके लिए स्थान नहीं है तो वे भूमिपर लेटकर गुजारा कर रहे हैं । माताएं बिलख रही हैं ।
“भ्रष्ट व्यवस्था और राजनेताओंके चलते यदि किसी देशकी यह स्थिति हो तो अचम्भित नहीं होना चाहिए । भ्रष्टाचार भारतकी प्रत्येक नसमें जा चुका है, अब इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिदू राष्ट्रकी ही आवश्यकता है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : एडिटर जी
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