जुलाई ६, २०१९
गुजरातके सूरतमें पुलिसको शुक्रवार, ५ जुलाईको आंसू गैसके गोले छोडने पडे, जब मुसलमानोंकी विशाल भीडने, अधिकारियोंद्वारा अनुमति देनेसे मना करनेके पश्चात भी, झारखण्डके कथित मॉबलिंचिंगकी घटनाके विरुद्घ रैली निकालनेका प्रयास किया । इस भीडके उग्र प्रदर्शनके समय ३ से ४ पुलिस कर्मियोंके चोटिल होनेके भी समाचार आ रहे हैं । इसके अतिरिक्त वाहनोंको भी क्षति पहुंचाई गई है ।
पुलिस आयुक्त सतीश शर्माने कहा कि मुसलमानोंके एक समूहने दो दिन पहले इसी प्रकरणपर एक ज्ञापन प्रशासनको सौंपा था और उसके पश्चात एक अन्य समूहने चौक बाजार क्षेत्रसे अठवामें कलेक्टर कार्यालयतक रैली निकालनेकी अनुमति मांगी थी ।
सतीश शर्माने कहा, “उन्हें अनुमति देनेसे मना कर दिया गया; क्योंकि यह दिन ‘वर्किंग डे’ था और जिस प्रकरणपर प्रदर्शनकी अनुमति मांगी गई थी, यह प्रकरण भी गुजरातका नहीं था ।” इसके पश्चात मुसलमान रैली निकालनेपर अडे थे; इसलिए उग्र भीडको नियन्त्रित करनेके लिए पुलिसको कमसे कम ८ आंसू गैसके गोले दागने पडे, क्योंकि समुदाय विशेषने प्रदर्शनके समय पथराव और आगजनी करना आरम्भ कर दिया । जिससे ४ से ५ पुलिस कर्मी चोटिल हो गए और बस सहित कई वाहनोंको भी हानि पहुंचाई गई ।
इस मध्य लोगोंने कहा कि मुसलमानोंकी भीडने चौक बाजार क्षेत्रसे आज जुमाके दिन रैली आरम्भ की । जब वे विवेकानंद सर्कलके पास पहुंचे तो पुलिसने उन्हें रोकनेका प्रयास किया; परन्तु भीड हिंसक हो गई और पथराव आरम्भ कर दिया ।
“यह है प्रधानमन्त्रीजीका ‘सबका साथ और सबका विश्वास’ योजनाका परिणाम ! सबका विश्वास जीतनेमें बस केवल हिन्दू ही छूट गया है, शेष सभीको बसों, वाहनों आदिको तोडनेका आदेशपत्र मिल गया है ! एक चोरके लिए प्रदर्शन कर रहे धर्मान्धोंके कारण लोगोंको कठिनाईयोंका सामना करना पड रहा है । जब पुलिसकर्मियोंपर पत्थर फेंकें जा रहे थे तो गोलियां क्यों नहीं चलाई गई ? प्रधानमन्त्रीजीसे नम्र निवेदन है कि शीघ्रातिशीघ्र इन प्रदर्शनोंपर रोक लगाएं; अन्यथा यह न हो कि कहीं वे सबका विश्वास जीतते-जीतते देशका विश्वास ही खो बैठे !- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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