केरलमें ननसे दुष्कर्मके विरुद्ध विरोधमें सम्मिलित ‘सिस्टर’को कविताएं लिखनेपर चेतावनी !!


दिसम्बर ९, २०१९

केरलमें एक ननके साथ हुए दुष्कर्मको लेकर जारी विरोध प्रदर्शनकी मुखर आवाजोंमेंसे एक नन लूसी कलप्पुराको कविताएं लिखनेके लिए अधिसूचना (नोटिस) दे दी गई है । वह पूछती हैं कि क्या किसी ननके लिए वाहन चलाना सीखना या कविता लिखना अनुचित है । वह ‘फ्रैंसिशन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रिगेशन’की एक नन हैं और ननसे दुष्कर्मके आरोपी ‘बिशप फ्रैंको मुलक्कल’के विरुद्ध विरोध प्रदर्शनमें सम्मिलित हैं । उन्हें प्रथम चेतावनी देते हुए पत्र भेजा गया है और ‘कॉन्ग्रिगेशन’से निलम्बित किए जानेकी चेतावनी दी गई है ।
उनको भेजे गए पत्रमें कहा गया है कि नन धार्मिक जीवनके आदर्शोंका उल्लंघन कर रही हैं, जो एफसीसीके नियमों और संविधानके विरुद्ध है । लूसीका कहना है कि उन्हें कोच्चिमें विरोध प्रदर्शनमें जानेका कोई पछतावा नहीं है । उन्होंने कहा कि प्रत्येकने नन्सके मुद्दोंको अनदेखा किया और इस पत्रसे यह सिद्ध होता है कि उनकी परेशानियोंको अभी भी अनदेखा किया जा रहा है ।

‘प्रविंशल सुपीरियर’ने लूसीको कविताओंकी पुस्तक प्रकाशित करनेकी आज्ञा नहीं दी; परन्तु उन्होंने फिर भी स्नेहा मझाइल नामकी पुस्तक प्रकाशित की । ननके गाडी चलाना सीखने और वाहन क्रय करनेकी याचिका भी अस्वीकृत कर कर दी गई; परन्तु उन्होंने वाहन चलाना सीखा, अनुमतिपत्र (लाइसेंस) बनवाया और वाहन क्रय किया ।

“एक ओर ईसाई मिशनरियां व चर्च धन देकर, महिला अधिकार, स्त्रीमुक्ति आन्दोलनका बहाना बनाकर हिन्दू देवालयोंमें हस्तक्षेप कर रहे हैं तो दूसरी ओर जो नन है, उसपर अत्याचार ! इससे ही ईसाई पादरियोंंका पाखण्ड उजागर होता है और यह सब केरलके निधर्मी शासनमें ही हो रहा है । वहीं शासन जो एक ओर महिलाओंका पक्षधर बन सनातन धर्मके नियमोंमें हस्तक्षेप कर रहा है तो दूसरी ओर ननोंका शोषण ! इससे स्पष्ट है कि सबरीमालापर केरल शासनके उच्चतम न्यायालयका आश्रय लेकर किए गए कृत्य केवल उनके हिन्दूद्रोहका ही परिणाम है ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : नभाटा



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