मार्च ९, २०१९
कांग्रेसकी भूपेश बघेलके शासन छत्तीसगढके वृत्तिहीन (बेरोजगार) और प्रतिभावान युवाओंको अंगूठा दिखा रहा है । कांग्रेस नेताओंके पुत्रोंको उप जिलाधिकारीके पदपर नियुक्तिकर प्रदेशके उन हुतात्मा सैनिकोंके शौर्यका अपमान किया है, जिन्होंने नक्सली हिंसा और देशकी सुरक्षाके लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया है । उक्त बातें भाजपा प्रदेश मन्त्री अनुराग सिंहदेवने कही ।
अनुराग सिंहदेव ने कहा कि भाजपा शासनने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विनोद चौबे, जो नक्सलियोंसे लोहा लेते हुए उनकी गोलियोंका लक्ष्य हुए थे, उनके पुत्रको अनुकम्पा नियुक्ति देकर उप जिलाधिकारी बनाया था; परन्तु कभी इन पदोंपर मन्त्रिमण्डलके अधिकारोंका दुरुपयोगकर राजनैतिक नियुक्ति नहीं की ।
कांग्रेसकी यह परम्परा रही है कि जब भी वो सत्तामें आते हैं, परिवार और कांग्रेसी नेताओंके उत्थानमें लग जाते हैं । पूर्वमें शिक्षा कर्मियोंकी भर्तीमें बोली व भाषाके आधारपर अंक देकर योग्य युवाओंको वंचित किया गया एवं सहस्रों नियुक्तियां की गईं । जब भाजपा शासन बना, तब कही जाकर योग्यताके आधारपर शिक्षाकर्मी भर्ती आरम्भ की गई ।
उन्होंने शासनसे पूछा है कि क्या झीरम आक्रमणमें कांग्रेसके सभी दिवंगत नेताओंके परिवार जनोंको उप जिलाधिकारी बनाया जाएगा । यह भी शासनको स्पष्ट करना चाहिए ।
प्रदेश शासनद्वारा बस्तरके झीरममें हुए नक्सली आक्रमणमें दिवंगत महेन्द्र कर्माके पुत्र आशीष कर्माको बिना किसी परीक्षाके उप जिलाधिकारी बनानेका निर्णय लेकर सहस्रों युवाओंको छला है, जो इस परीक्षाके लिए दिन-रात परिश्रमकर ‘पीएससी’की तैयारी कर रहे हैं ।
“केवल छत्तीसगढसे ही नहीं, देशके प्रत्येक स्थानसे यह समाचार आना साधारण हो गया है कि नेता अपने सम्बन्धियोंको ही उच्च पदोंपर आसीन करते हैं, जिसका परिणाम दिन-रात परिश्रम कर रहे छात्रोंको भोगना पडता है और शासन चलाने हेतु अयोग्य छात्र आगे आते हैं । इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु राजनीतिका शुद्धिकरण आवश्यक है, जो हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनापर ही सम्भव है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : पत्रिका
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