जल्लीकट्टू के बाद एक और हिन्दू संत श्री आशुतोष महाराज पर हमला |


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कुछ सालों से हिन्दू त्योहारों तथा हिन्दू संतो एवं देवी देवताओं पर हमले बढ़ से गए हैं | कभी हम देखते हैं होली खेलने में पानी की बर्बादी पर आसाराम पर केस हो जाता है , कभी मीडिया को दही हांडी में बच्चों पर अत्याचार होता दिखता है , कभी दीपावली में प्रदुषण के कारण दिल्ली में केस हो जाता है , कभी शिवरात्रि पर दूध चढाने का विरोध फिल्मो में होता है तो कभी कावड़िया यात्रा के विरोध में आउटलुक मैगज़ीन में लेख छपने लगते हैं | यही नहीं एम् ऍफ़ हुसैन को भी नंगी तस्वीरे हिन्दू भगवानो की ही बनानी होती हैं तथा वामपंथी बुद्धिजीवियों को गाय के बीफ की पार्टी करनी होती है जिसे करोडो हिन्दू माँ मानते हैं | इसी तरह एक अच्छा कार्यक्रम करवाने के लिए भी श्री श्री रविशंकर और आर्ट ऑफ़ लिविंग वालों पर दिल्ली में पर्यावरण उलंघन का केस किया जाता है  तथा जे.एन.यू. में महिषासुर दिवस मनाकर माँ दुर्गा को गाली दी जाती है |

अभी हाल ही में हिन्दू धर्म के त्यौहार जल्लीकट्टू पर पेटा और तथाकथित वामपंथी बुद्धिजीवियों ने कोर्ट में केस दाखिल करवाया था जिससे देश भर में तथा तमिलनाडु में विरोध के स्वर उठ ही रहे थे के पंजाब के एक और हिन्दू संत, श्री आशुतोष महाराज के ऊपर सोमवार को पंजाब /हरयाणा हाईकोर्ट में जब संस्थान के वकील ने कोर्ट में कहा के हिन्दू धर्म में संत समाधी में जाते रहते हैं और ऐसा इनके अनुयायियों का भी मानना है । इस पर हाई कोर्ट में सवाल उठाये गए तथा यहाँ तक कहा गया के ये संत हैं या नहीं यह साबित करो ? यह भी पूछा गया के इन्हें किसने संत बनाया ?

दरअसल पूरा मुद्दा यह है के श्री आशुतोष जी महाराज पंजाब के बहुत बड़े संत हैं | इनके लाखो की संख्या में भक्त देश भर में हैं | मुद्दा यह हैं के संत आशुतोष जी महाराज ने पूरी जिंदगी पंजाब में आतंकवाद को ख़त्म करने तथा हिन्दुओ और सिक्खों को एक करने तथा प्रेम और एकता का सन्देश देने में व्यतीत करी | यही नहीं इन्होने देश के कई युवाओं को अध्यात्म से और धर्म से जोड़ा तथा आज भी इनके कई भक्त समाज सेवा और जैविक कृषि करके ना सिर्फ देश का बल्कि समाज का भी कल्याण कर रहे हैं | अब बात आती है २०१४ की , इस समय आशुतोष जी महाराज ने अपने सभी भक्तो के सामने आश्रम में समाधी ले ली तथा इन्होने कुछ दिनों पहले कुछ भक्तो से कहा था के वो समाधी के बाद वापस आयेंगे | इसी आशा में भक्तो ने उनके शरीर को संभाल कर रख लिया | अब जो लोग बाबा के जिन्दा रहते कभी आश्रम में कुछ नहीं कर पाए उन सभी ने बाबा के भक्तों में भ्रामक प्रचार करना शुरू कर दिया | पर उसका कोई खास असर नहीं हुआ और बाबा के अनुयायी अपने समाज सुधार और हिन्दू सिख एकता के कार्य में लगे रहे | इसी बीच एक व्यक्ति बिहार से आया जिसने कहा वो आशुतोष जी का बेटा है जिसे वो बहुत साल पहले छोड़ कर चले गए थे , तथा एक व्यक्ति और आया जिसने कहा के वो आशुतोष जी का कई साल पहले ड्राईवर था | इन दोनों ने कोर्ट में यह केस किया के आशुतोष जी की हत्या हुई है और वो समाधी में नहीं हैं | बाद में कोर्ट में यह सिद्ध हो गया के बाबा को जेड सिक्यूरिटी मिली हुई थी और उन्होंने पुलिस तथा अपने अनुयायियों के सामने समाधी ली थी अतः हत्या का सवाल ही नहीं उठता  | इसी के साथ वो लड़का अपने आप को उनका बेटा सिद्ध करने में भी कोर्ट में नाकाम रहा | बाद में इन्होने केस यह कर दिया के हमें आशुतोष जी के शरीर का क्रियाक्रम करना है | इस पर अनुयायियों ने कहा वो अभी समाधी में हैं हम उन्हें नहीं जलाने दे सकते | इसी बात पर कई दिनों तक केस चलता रहा तथा बाद में सरकार पर कोर्ट ने यह बात छोड़ दी और पंजाब सरकार ने भी यह राय दी के यह श्रद्धा का मामला है इसमें कोर्ट को या किसी को भी बीच में नहीं आना चाहिए | इसी तरह यह केस चलता रहा है , जिसमे आशुतोष जी के विरोधी पक्ष के लोग उनके शरीर को जलाने की मांग कर रहे हैं , जबकि अनुयायी बोल रहे हैं यह उनकी श्रद्धा का मामला है , उनके गुरु के शरीर को वो लोग संभाल कर रखना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है के वो समाधी में हैं | आश्चर्य की बात यह है के विरोधी पक्ष के लोग इस बात का भी तर्क नहीं दे पा रहे के आखिर वो जबरन क्यों आशुतोष जी के शरीर को जलाना चाहते हैं | एक बार तो विरोधी पक्ष पर्यावरण प्रदुषण और बीमारी फैलने जैसे तर्क भी अदालत में रख चूका है | आशुतोष जी के अनुयायी इस बात को लेकर बहुत दुखी हैं के उनके गुरु के प्रति उनकी श्रद्धा की कोई कद्र नहीं कर रहा |

यही केस कल सोमवार को पंजाब/हरयाणा हाई कोर्ट में फिर से शुरू हुआ है जबकि दोनों व्यक्ति ड्राईवर तथा बेटा पहले ही झूठे साबित हो चुके थे | इसके बाद भी कोर्ट में सुयो-मोटो के आधार पर केस दाखिल किया गया | तथा जब आशुतोष जी के वकील ने यह बात कोर्ट के सामने रखी के दुनिया भर में कई शरीरो को श्रद्धा के आधार पर लोग संभाल कर रखते हैं ऐसे ही गोवा के चर्च में सेंट ज़ेवियर का शरीर भी रखा गया है , तो हिन्दू महाराज का शरीर समाधी अवस्था में क्यों नहीं रखा जा सकता ?,  तो इस बात पर यह सवाल उठाये गए के क्या आशुतोष महाराज कोई संत हैं ? इसाई मजहब में तो संतहुड से संतो की दीक्षा होती है उससे सेंट ज़ेवियर संत बने थे | आशुतोष जी ने कहाँ से संत की उपाधि ली ? यह सब सवाल उस आशुतोष महाराज पर उठाये गए हैं जिनके लाखो की संख्या में अनुयायी हैं तथा जिन्होंने कई लोगो को दीक्षा दी है तथा धर्म और आध्यात्म पर हजारो व्याख्यान किये हैं |

इस तरह के सवाल एक संत पर उठाये गए तथा केस को आगे बढ़ा दिया गया | यहाँ मूल सवाल यह उठता है के आखिर कब तक हिन्दू संतो पर इस तरह के सवाल उठते रहेंगे | यदि तूतेंन खामेन, लेनिन , सेंट ज़ेवियर इत्यादि के शरीर संभाल कर रखे जा सकते हैं तो एक हिन्दू संत के शरीर को रखने में क्या दिक्कत है ? कहीं इसके पीछे पाकिस्तान के आई.एस.आई. का घिनौना खेल तो नही जिसके द्वारा वो भारत में हिन्दुओ और सिक्खों को लडवाना चाहता है जिससे बाद में दोनों को बाँट कर खुद राज कर सके | क्योंकि आशुतोष जी महाराज के अनुयायी पंजाब में हिन्दू और सिक्खों की एकता को बनाये रखने का काम करते हैं | यही नहीं आशुतोष जी ने अपने जीवन काल में कई उग्रवादियों से आत्मसमर्पण करवाया था | या फिर इसके पीछे अंग्रेजी मेकाले बुद्धिजीवियों का गुट है जिनका शुरू से मानना है के भारत के धर्म और संस्कृति का नाश करके इसे पूरी तरह अंग्रेजी बना दिया जाए |

कारण जो भी हो पर हिन्दू संतो पर इस तरह एक के बाद एक हमले तथा इलीट क्लास बुद्धिजीवियों का हिन्दू धर्म के खिलाफ मीडिया, सिनेमा तथा कोर्ट में हर बार खड़े रहना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है | देखना होगा के क्या आशुतोष जी के अनुयायियों को हाई कोर्ट में न्याय मिल पायेगा या उनका हाल भी बाकी हिन्दू बाबाओं की तरह ही होगा | फैसला जो भी हो अब श्री आशुतोष जी महाराज के लाखों भक्त तथा सभी हिन्दू अब न्याय के मंदिर हाई कोर्ट की ओर आस लगाये बैठे हैं के उन्हें न्याय मिले | आशा है इस बार इन्हें न्याय जरुर मिलेगा |

 

सौजन्यसे : http://azadgurukul.in/



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