देव स्तुति


तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।

महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥

अर्थ : उन सूर्यदेवको, जो जगतके नायक हैं, ज्ञान, विज्ञान तथा मोक्षको भी देते हैं, साथ ही जो बडे-बडे पापोंको भी हर लेते हैं, मैं प्रणाम करता हूं ।



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