२३ अप्रैल, २०२०
जहां शासन महामारीके प्रसारको रोकने हेतु गृह-बन्दी (लॉकडाउन) घोषित कर युद्ध स्तरीय प्रयास कर रहा है और केवल आवश्यक सेवाओंसे जुडे लोगोंको आज्ञा पत्रके माध्यमसे शासनने आने-जानेकी आज्ञा दी है; वहीं जिहादी इसे विफल बनानेमें पूर्णतः प्रयासरत हैं । परन्तु पुलिसकी सर्तकताने उनकी योजनाओंपर पानी फेर दिया | प्रकरण देहलीका हैं जहां मकसूद आलम नामक वाहन चालक अपने रुग्ण परिचित मोहम्मद मुनीफसे जोकि बिहारके एक चिकित्सालयमें भर्ती है, जिसके चलते उनका बेटा इरशाद उनसे मिलने बिहार जाना चाहता था | जिस कारण वे लोग योजनाकर परिवारजनों सहित मिथ्या आज्ञा पत्र (पास) बनवा बिहार कूच करनेके प्रयासोंके मध्य दिल्ली पुलिसद्वारा बन्दी बना लिया गया । पुलिसको उसने यह भी सूचित किया कि उसे सैयद फहद नामक व्यक्तिने उन्हें यह मिथ्या अनुमति पत्र उपलब्ध करवाया था ।
जहां योगी आदित्यनाथ जैसे आदर्श राजनेता नियम वचनोंका पालन कर अपने मृत पिताकी अंत्येष्टिमें भी सहभागी नहीं हो रहे हैं वही यह जिहादी असत्य कहानियां बना नियमोंके उल्लंघन सहजतासे कर रहे हैं । क्या ऐसे राष्ट्रदोही गृह बन्दीको सफल सिद्ध होने देंगे ?-सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : डेलीहंट
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