
हावड़ा/नई दिल्ली – राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम मंगलवार को धूलागढ़ पहुँची और पश्चिम बंगाल दंगों के पीड़ितों से बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना। गृह मंत्रालय के निर्देश पर धूलागढ़ पहुंची राष्ट्रीय महिला आयोग की चार सदस्यीय टीम के सदस्यों को देख पीड़ित महिलाएं रो पड़ीं और अपना दर्द बयां किया।
पीडित महिलाओं ने बताई अपनी आबरू लूटने की कहानी –
पीड़ितों महिलाओं ने आयोग के सदस्यों को 13 दिसंबर की रात झुंड में पहुंचे हमलावरों ने हथियारों के बल पर किस तरह उनकी आबरू लूटी व घर को आग के हवाले कर दिया, इसकी पूरा कहानी बयां की। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम ने पूरे घटनास्थल का दौरा किया, हालांकि इस दौरान देवानघाटा में दूसरे पक्ष की महिलाओं ने आयोग की टीम को रोकते हुए बदसुलूकी की। ममता बनर्जी के बंगाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही उनके कार्यो पर उगली उठती रही है। ताजूब कि बात है कि घटनास्थल से राज्य सचिवालय 20 मिनट की दूर है, लेकिन ममता अभी तक पीड़ितों से मिलने नहीं गयी हैं। ऐसा लगता है कि ममता मुख्यमंत्री नहीं, प्रशासक बन गयी हैं। आयोग पूरी घटना की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को जल्द सौप देगी, जिसके बाद से बवाल होना और ममता कि मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
ममता सरकार पर सवाल –
ममता बनर्जी किसी राज्य कि मुख्यमंत्री कम और एक प्रशासक ज्यादा लगती हैं। अगर बिहार में लालू यादव के राज में हो रही हिंसा और अपराध को देखते हुए बिहार को जंगलराज घोषित किया जाता है तो बंगाल के हाल को देखते हुए दीदी का राज दंगा राज बनता जा रहा है। इस बात से कोई अंजान नहीं है कि ममता का रिश्ता इस्लामिक संगठनों से रहा है। इस बात के भी कई सबूत मिले हैं जिससे साफ पता चलता है कि टीएमसी बांग्लादेशी आतंकी संगठनों को फंड देती है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल की सरकार जानबूझकर, एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए या मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए कानून-व्यवस्था की अनदेखी कर रही है? या फिर यह मान लिया जाए कि पश्चिम बंगाल सरकार सब कुछ जानते और समझते हुए भी कानून व्यवस्था बनाए रखने में फेल हो गई?
सौजन्यसे: http://www.newstrend.news
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