दिसम्बर २०, २०१८
गोवाके मर्सेजकी रहने वाली मुस्लिम युवतीको ‘नैशनल एजिलिबिलिटी टेस्ट’में (एनईटी) बैठनेके लिए ‘हिजाब’ उतारनेको कहा गया । युवतीने इसे इस्लामके विरुद्ध बताते हुए परीक्षा ही छोड दी ! उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उनके साथ इसप्रकारका भेदभाव हो चुका है । युवतीने सामाजिक प्रसार माध्यमोंके द्वारा अपनी आवाज उठाई है । उनका कहना है कि उन्हें ‘हिजाब’ पहननेपर विरोधका सामना करना पड रहा है, जबकि ‘नन’को ‘हेडगियर’ पहननेकी अनुमति दे दी जाती है !
मनोचिकित्सक और लेखिका २४ वर्षीय सफीना खान सौदागरके फेसबुक लेखके पश्चात उनके समर्थनमें कई लोग सामने आए हैं । सफीनाने दावा किया कि वह एनईटीकी परीक्षा देनेमें असमर्थ रहीं; क्योंकि उनसे परीक्षामें बैठनेके लिए हिजाब हटानेको कहा गया था । सफीनाने कहा कि उन्हें भिन्न-भिन्न अवसरोंपर भेदभावका सामना करना पडा है; क्योंकि वह धार्मिक कारणोंसे सिरपर हिजाब पहनती हैं ।
उन्होंने दावा किया कि पारपत्र (पासपोर्ट) बनवाते समय भी उनके साथ इसी प्रकारका भेदभाव किया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इसी वर्ष जूनमें जीएमसी कर्मीने वार्डके भीतर जानेसे मना कर दिया था, जहां उनके पिताके मित्र भर्ती थे । उन्होंने बताया, “हमसे कहा गया कि पहले हिजाब पहने महिलाओंके घुसनेपर कुछ घटनाएं हो चुकी हैं और काफी देर बहसके पश्चात ही हमें प्रवेश मिला था ।”
सफीना लिखती हैे, “मैंने उनके नियमोंको मानते हुए परीक्षामें न बैठनेका निर्णय किया । मंगलवारको मैं ‘नेट’की परीक्षामें बैठने वाली थीं, लेकिन वहां मुझे अनुमति नहीं दी गई, क्यों ? क्योंकि मैंने ‘हिजाब’ उतारनेसे मना कर दिया । हां, यह एकदम सही है । एक लोकतान्त्रिक देशमें, एक धर्मनिरपेक्ष समाज और गोवा जैसे राज्यमें मुझे एक परीक्षामें बैठने नहीं दिया गया ।”
सफीनाने बताया कि उनसे कहा गया कि उन्हें अपने कान दिखानेकी आवश्कता है और अधिकारियोंके साथ काफी देर वार्ताके पश्चात वह पुनः अपना हिजाब इस प्रकारसे बांधनेको तैयार हुईं ताकि कान दिखाई दें ।
सफीनाने आरोप लगाया कि उन्हें यह भी कहा गया कि उन्हें पूरी परीक्षाके समय हिजाब हटाकर बैठना होगा, इसलिए उन्होंने परीक्षामें न बैठनेका निर्णय किया । सफीनाने कहा, “यह कोई एकमात्र घटना नहीं है । मुझे हिजाबको लेकर इसी प्रकारकी कई घटनाओंका सामना करना पडा । सफीनाने इस्लामके अनुसार हिजाब पहनने वाले लोगोंने कहा है वह इस कथित अन्यायके सामने आए । एक शिक्षा अधिकारीने बताया कि वह परीक्षण और नकल रोकनेके लिए ‘हेडगियर’ उतारनेका निवेदन करते हैं ।
“सफीना एक मनोचिकित्सक है, परन्तु दुखद है कि वे भी इस्लामकी तथाकथित मानसिकताके रोगसे पीडित है ! क्या एक मनोचिकित्सकको इतना ज्ञान व समझ नहीं कि अधिकारी हिजाबको उतारनेको क्यों कह रहे हैं और उसका अनुपालन करना आवश्यक है ! इस्लाम तो बुर्का पहननेको भी कहता है तो क्या वे वह भी धारण करेंगीं ? यह देश आपको इतना सम्मान दे रहा है कि आप इतने ऊंचे पदपर जाकर परीक्षाएं दे रही हैं, विश्वके किस इस्लामिक देशमें ऐसा होता हैं, जाकर ढूंढें ! इतनेपर भी आपको राष्ट्रके प्रति सम्मान नहीं, यह निन्दनीय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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