जून ५, २०१९
भारतीय जनता पार्टी बंगालके ‘मिशन-२०२१’पर जोर-शोरसे लगी हुई है । इसीके अन्तर्गत तृणमूल कांग्रेसकी प्रमुख और पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीकी बीजेपीके साथ खींचतान भी स्पष्ट दिख रही है । भाजपाने एक बडा दांव चलते हुए अब जय श्रीरामके उद्घोषके साथ जय मां काली जोड लिया है । उधर, ममता बनर्जी मुस्लिम समुदायको आश्वस्त करनेमें जुटी हैं कि उन्हें किसीसे भयभीत होनेकी आवश्यकता नहीं है । जय श्रीरामके उद्घोषके साथ जय मां कालीका जुडना टीएमसीके लिए मुद्दा बन गया है । ममता बनर्जीके भतीजे अभिषेक बनर्जीने इस प्रकरणको लपकते हुए भाजपापर कटाक्ष किया है ।
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जीने कहा, ‘लोगोंने मुझे बताया कि दिलीप घोषने कहा है कि जय श्रीरामके साथ जय मां कालीके भी नारे लगाएं । मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि ममता बनर्जी वहां थीं, इसी कारण एकाएक रामकी ‘टीआरपी’ नीचे चली गई और मां कालीकी ‘टीआरपी’ ऊपर हो गई !’
बंगाल बीजेपीके प्रभारी कैलाश विजयवर्गीयने राज्यमें लोकसभा मतदानमें पार्टीकी विजयके पश्चात कहा, ‘पश्चिम बंगालमें हमारे उद्घोष जय श्रीराम और जय महाकाली होंगें । बंगाल महाकालीकी भूमि है । हमें मां कालीका आशीर्वाद चाहिए ।’ बीजेपीने राज्यके लिए अपने नारोंकी सूचीमें जय महा काली ऐसे समयमें सम्मिलात किया है, जब टीएमसीने बीजेपीपर बाहरी लोगोंकी पार्टी होनेका आरोप लगाया, जो बंगालकी संस्कृति नहीं समझते हैं ।
“नेता अपनी भद्दी वाणीसे एक ईश्वरके भिन्न-भिन्न नामोंका प्रयोगकर लोगोंको मूढ बनाते हुए अपनी भद्दी राजनीतिका खेल खेल रहे हैं । तृणमूल नेता, जो राम और कालीके बारेमें ऐसा बोलकर सिद्ध कर रहे हैं कि उनकी ईश्वरमें कोई आस्था नहीं है और वे अपनी विकृत बुद्धिसे ईश्वरके नामोंको टीआरपीसे जोडकर प्रयोग कर रहे हैं । हिन्दुओ ! यदि सत्यमें ईश्वरको मानते हैं और आस्था रखते हैं तो इन नेताओंका प्रतिकार करें । ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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