महाराष्ट्रमें कोट्यावधिकी सम्पत्तिका मोह छोड वैराग्यकी राहपर चला परिवार !


जनवरी १२, २०१९

मुम्बई : भिवंडीके गोकुलनगरके राकेश कोठारीका समूचा परिवार वैराग्यकी राहपर निकल पडा है ! राकेश कोठारी, उनकी पत्नी सीमा, पुत्र मीत और पुत्री शैली, ११ फरवरीको गुजरातके संखेश्वरमें जैन धर्मकी दीक्षा लेंगें । इन्होंने दीक्षा लेकर जैन धर्मके अनुसार संयमित जीवन व्यतीत करनेका निर्णय लिया है । उन्होंने पारम्परिक रूपसे बैंड-बाजेके साथ अपने वैराग्यका उत्सव मनाया, जिसमें अधिट संख्यामें जैन समाजके लोग सम्मिलित हुए । गोकुलनगर स्थित वीर संन्यास वाटिकातक प.पू. पं. श्रीजयभूषण विजयजी म.सा.के मार्गदर्शनमें गिरनार भावयात्राके पश्चात दीक्षाके लिए विरती वंदना कार्यक्रमका आयोजन किया गया ।

राकेश कोठारी (४५) ‘टेक्सटाइल’ व्यापारी हैं और उनका कोट्यावधि रुपयोंका व्यापार है । सीमा कोठारी (४३) गृहिणी हैं । उनके पुत्र मीत कोठारी (२१) हिंदुजा महाविद्यालयसे ‘बीकॉम’ करनेके पश्चात ‘सीए’का पाठ्यक्रम कर रहे थे । शैली कोठारी (१९) ‘एचएससी’के पश्चात धार्मिक शिक्षा ले रही थीं । उसे गानेका चाव था और वह ‘इंडियन आयडल’में जाना चाहती थीं । इन चारोंके दीक्षा लेनेके पश्चात अब राकेश कोठारीके परिवारमें व्यापार देखनेवाला उनका कोई नहीं रहेगा ! उनके घरमें भी ताला लग जाएगा !

राकेश कोठारीने ‘एनबीटी’को बताया, “मैंने जैन धर्मको समझ लिया है । शाश्वत सुख साधू जीवनमें ही मिल सकता है ! मोक्षकी प्राप्ति दीक्षा लेनेमें ही है, इसीलिए मैंने दीक्षा लेनेका निर्णय किया है । जगतमें दुखोंको अल्प करनेके लिए मेरे परिवारने वैराग्य धारण किया है !”

भिवंडीके अंजुरफाटाकी वैरागी तातेडने भी वैराग्य ले लिया है । महावीर चौक स्थित महावीर रेसीडेंसीमें रहनेवाली वैरागी भी ११ फरवरीको दीक्षा लेंगी ! महाविद्यालयकी शिक्षा कर चुकी वैरागीने २०१३ में पालीतानामें चातुर्मास भी किया था ।

“जहां एक ओर जन्म हिन्दू साधना करनेके नामसे ही उद्विग्न हो जाते हैं, वहां ऐसे कुटुम्ब, अन्धकारमें प्रकाशकी भांति आशा देते हैं । हिन्दुओ ! यह मानव जीवन मिलना कठिन है, उसपर भी सनातन धर्म युक्त जीवन अत्यधिक कठिन है; अतः अपनेको भाग्यशाली मानकर साधना करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : नभाटा



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