विवेकसे ही उचित अनुचितका बोध!


बुद्धिका रूपांतरण विवेकमें होनेसे धर्म, अधर्म, पाप, पुण्य, उचित अनुचितका बोध होता है | आज अधिकांश लोगोंमें विवेकके जागृत न होनेसे वे व्यावहारिक दृष्टिसे बुद्धिमान होते हुए भी योग्य निर्णय लेनेमें असमर्थ होते हैं और अनुचित निर्णय लेनेसे उनका आध्यात्मिक पतन होता है या पापकर्म निर्माण होता है ! ध्यान रहे भारतमें ९५ % भ्रष्टाचार करनेवाले लोग मूर्ख नहीं है, सब पढे-लिखे विवेकशून्य मूर्ख हैं !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution