जून १९, २०१९
१७वीं लोकसभाके पहले सत्रकी कार्यवाही सोमवार, १७ जूनको आरम्भ हुई थी । पहले दिन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके साथ नूतन चुने गए सदस्योंने निचले सदनकी सदस्यताकी शपथ ली थी । लोकसभामें शपथके दूसरे दिवस मंगलवारको शपथके समय संसदमें ‘जय श्रीराम’के उद्घोष किए गए, जिससे विवाद हो गया ।
इसपर समाजवादी पार्टीके सांसद आजम खांने कहा कि भला हमें जय श्रीरामसे क्या विरोध हो सकता है ? यदि संसदमें जय श्रीरामके उद्घोष होते हैं, तो ‘अल्लाह-हू-अकबर’से किसीको क्यों विरोध होना चाहिए ? बात निकली है, तो बहुत दूर तलक जाएगी । रामचंद्रसे मुसलमानोंका कोई विवाद नहीं है और न ही हो सकता है । हम किसी धर्मका अपमान कर ही नहीं सकते; परन्तु जब पैगम्बर मोहम्मद साहबके लिए कोई बात आती है तो दुःख होता है ।
उन्होंने ये भी कहा कि हमारे यहां लडकियोंको शिक्षा दी जाती है, जिससे वो अभियन्ता (इंजीनियर) बनें । ऐसे अभियन्ता बनें, जिनकी गुणवत्ता उत्तम हो ।
“ईश्वरके सभी नाम एक ही होते हैं; परन्तु आजम खानजी आपने ‘जय श्रीराम’ बोलकर किसीको लोगोंको मारते देखा है क्या ? या किसी अन्य द्रोही देशका गुणगान करते देखा है क्या ? और यदि रामसे समस्या नहीं तो राम मन्दिरका विरोध क्यों करते हैं ? समस्या ‘अल्लाह हू अकबर’से नहीं वरन अकबरकी काफिरवाली व लुटेरी मानसिकतासे है, जो किसीके देशमें घुसकर वहां अपना अधिकार स्थापित करना चाहते हैं । अतः यह देश तो जय श्रीरामका ही आश्रय लेगा ताकि धर्मनिरपेक्षताके फेरमें भारतके साथ वह न हो, जो सीरिया आदि देशोंके साथ हुआ ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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