विरोध करें, ईसाई मुख्यमन्त्री जगन रेड्डीने अपने मामाको बनाया तिरुपति तिरुमला ट्रस्टका अध्यक्ष, लोगोंने किया विरोध !


जून ११, २०१९

आन्ध्र प्रदेशके मुख्यमन्त्री जगन मोहन रेड्डीने अपने मामा वाई.वी. सुब्बा रेड्डीको ‘तिरुपति तिरुमला देवस्थानम ट्रस्ट बोर्ड’के अध्यक्ष पदपर नियुक्त किया है !! इस नियुक्तिके पश्चात लोगोंने और राजनीतिक व्यक्तियोंने कई प्रश्न खडे किए । मुख्यमन्त्री जगन मोहन रेड्डी और उनका परिवार ईसाई धर्ममें विश्वास रखता है  !! बता दें कि वेंकटेश्वर मंदिरका प्रबंधन देखनेवाला ‘टीटीडी’ भारतके सबसे धनी मन्दिर समितियोंमेंसे एक है ।

२००९ में जब जगनके पिता और तत्कालीन मुख्यमन्त्री राजशेखर रेड्डीकी एक हैलिकॉप्टर दुर्घटनामें मृत्यु हो गई थी । उनकेद्वारा भी देवस्थानम बोर्डमें की गई नियुक्तियोंपर प्रश्न खडे हुए थे । कई लोगोंका मानना था कि रेड्डी मंदिर बोर्डका ईसाईकरण कर रहे हैं । २००६ में गोल्ड किन स्कैंडल भी सामने आया था । २०१२ में जगन मोहन रेड्डीने बिना डिक्लेरेशन फॉर्म भरे मंदिरमें प्रवेश किया था, जिसके पश्चात बवाल खडा हो गया था (इस फॉर्मको भरना नॉन-हिन्दुओंके लिए आवश्यक है)। टीटीडीने कहा था कि जगनको तिरुपति भगवानमें विश्वास है और इसीलिए यह अनिवार्य नहीं है ।

इसके पश्चात जनसेनाके अध्यक्ष और तेलुगु अभिनेता पवन कल्याणने कहा था कि जगनने चप्पल-जूते पहनकर मंदिरमें प्रवेश किया है; इसीलिए उन्हें सत्ता कभी नहीं मिल सकती है । टीटीडीके मुख्य पुजारी रहे रमना दिक्षितुलूको वाइएसआर परिवारका निकटवर्ती माना जाता था । उन्हें चंद्रबाबू नायडूके शासनके समय वित्तीय अनियमितताओंके आरोपोंके कारण हटा दिया गया था । उन्होंने दावा किया था कि मंदिरका रसोईघरकी खुदाईके पश्चात मैसूरके राजाद्वारा दिया गया गुलाबी हीरा मिला था, जिसका कुछ ज्ञात नहीं हुआ ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि टीटीडी नायडू परिवारद्वारा संचालित हेरिटेज समूहसे दूध क्रय कर रहा है । जगन रेड्डीने शपथ ग्रहणसे पूर्व तिरुमाला जाकर स्वामी वेंकटेशकी पूजा की थी । अभी कुछ दिनों पूर्व टीटीडीकी सदस्या सुधा मूर्तिने त्यागपत्र दे दिया था । सुधा मूर्तिने इसका कोई कारण नहीं बताया था । वह इनफोसिस फाउंडेशनकी अध्यक्षा रही है । उन्होंने कहा कि यदि नूतन शासन उन्हें बुलाता है, तो वह अपनी सेवा देनेके लिए सज्ज हैं । यद्यपि, नूतन अध्यक्ष सुब्बा रेड्डीने कहा है कि वे शत प्रतिशत हिन्दू हैं और सबरीमाला मंदिरमें दर्शन करने भी जाते रहते हैं ।

“यह है मन्दिरोंके शासकीयकरणके दुष्परिणाम ! अब न केवल शासकगण मन्दिरोंका धन हडपना चाहते हैं, वरन ईसाईयोंको मन्दिरोंमें घुसाकर मन्दिरोंका ईसाईकरण भी करना चाहते हैं ! हिन्दुओ ! हमें अपने देवालयोंको बचाने हेतु एकत्र होना होगा और शासकगणोंको विवश करना होगा कि मन्दिरपर उनका नहीं हिदुओंका अधिकार है और उसके निर्णय नास्तिक शासकगण नहीं वरन धर्मधुरन्धर शंकराचार्यद्वारा ही लिए जाने चाहिए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ऑप इण्डिया



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution