९ अप्रैल, २०२०
वास्तवमें निजामुद्दीन स्थित मरकज जबसे ‘कोरोना’ विषाणु संक्रमणका केंद्र बनकर उभरा है यहांसे गए जमातके सदस्योंकी देशभरमें खोज की जा रही है। जमातके सदस्योंकी खोजमें यह ढूंढा जा रहा है कि कौन-कौनसे लोग वहां मजहबी आयोजनमें सम्मिलित हुए थे, जिससे उनकी जांच कराई जा सके । इसी क्रममें झारखण्ड पुलिसने यह सूचना दी है कि जमातियोंद्वारा देहलीमें प्रयोग किए जा रहे चलभाष ‘सिम’का पंजीकरण उन हिन्दू आदिवासीयोंके ‘आधार कार्ड’से किया गया है, जो कभी देहली गए ही नहीं ! आशंका प्रकट की जा रही है कि जमातके लोगोंने अपना अभिज्ञान न होने देनेके लिए आदिवासियोंके नामपर फर्जी ढंगसे ‘सिम’ लिया है ।
– यह कार्य बिना यहांके जिहादियों व मस्जिदोंके सहायताके बिना सम्भव नहीं है और कौन जानता है कि ये ‘सिम‘ धार्मिक कार्यक्रममें सम्मिलित होनेके लिए लिए थे या भारतमें देहली उपद्रव सदृश किसी प्रकरणको लेकर अस्थिरता उत्पन्न करनेके लिए ? मोदी शासन अब कृपया तुष्टिकरण छोडकर ऐसे सभी लोगों व कथित धार्मिक संस्थानोंपर कार्यवाही करे और कलको ये कुछ बडा कार्य करके भागेंगें तो शासन किसे ढूंढेगा ?; अतः ‘सिम‘ लेनेकी प्रक्रियाको भी कडा किया जाना आवश्यक है ।
स्रोत : ऑपइंडिया
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