तीन तलाक विधेयकका विरोध करेगी जेडीयू, कहा कि मुसलमानोंपर कोई भी विचार नहीं थोपा जाना चाहिए !!


जून १५, २०१९

संसदके आगामी सत्रमें मोदी शासन नूतन ढंगसे तीन तलाक विधेयकको प्रस्तुत करने वाली है । तीन तलाकसे जुडे विधेयकको बुधवार, १२ जूनको प्रधानमन्त्री मोदीकी अध्यक्षतामें हुई मन्त्रिमण्डल बैठकमें स्वीकृति दी गई थी । सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकरने कहा है कि शासनको आशा है कि इस बार राज्य सभामें विपक्षका समर्थन मिलेगा और इस विधेयकको स्वीकृति मिल जाएगी; परन्तु तीन तलाकके प्रकरणपर एक बार पुनः एनडीएकी सहयोगी पार्टी जेडीयूने विरोध किया है । जेडीयूने अपना विरोध प्रकट करते हुए कहा कि बिना व्यापक परामर्शके मुसलमानोंपर कोई भी विचार नहीं थोपा जाना चाहिए ।

जेडीयूके प्रवक्ता के. सी. त्यागीने शुक्रवार, १४ जूनको वक्तव्य जारीकर कहा कि पार्टी अपने पुरानी बातपर बनी हुई है । हमारा देश विधानके सम्मान और विभिन्न धर्मों व पारम्परिक समूहोंके सिद्धान्तोंके मध्य संतुलन बनाए रखनेपर आधारित है । के.सी. त्यागीने कहा कि उनके विचारसे ‘सिविल कोड’पर विभिन्न धर्मोंके मध्य और गहराईसे विचार-विमर्श करनेकी आवश्यकता है । वर्तमान धार्मिक रीतियों जैसे विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना, पैतृक सम्पत्तिके अधिकार जैसे जटिल व संवेदनशील मुद्दोंपर शीघ्रतामें कोई पग उठाना ठीक नहीं होगा ।

इस बारेमें जेडीयूके राष्ट्रीय महासचिव और बिहारके उद्योग मन्त्री श्याम रजकने भी कहा था कि तीन तलाकके प्रकरणमें उनकी पार्टी केन्द्रका साथ नहीं देगी । रजकने कहा कि प्रकरण चाहे राममंदिरका हो, तीन तलाकका हो या धारा-३७० का, पार्टी इसका समर्थन नहीं करती है ।

“मुस्लिम तुष्टिकरणमें नेताओंको इतना भी सामान्य ज्ञान नहीं है कि किसी महिलाका जीवन नष्टकर हलाला जैसी कुप्रथाको धार्मिक और सैद्धांतिक कैसे बताया जा सकता है ? क्या ऐसे नेता शासन करने योग्य हैं ? इन सत्तालोलुप व राष्ट्रद्रोही नेताओंका आगामी हिन्दू राष्ट्रमें कोई स्थान नहीं होगा !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : ऑप इण्डिया



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