तीन दशक पश्चात संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालयका सत्र जुलाईसे होगा आरम्भ, ज्‍योतिष, कर्मकांड, वास्‍तु आदि पाठ्यक्रम होंगें सम्मिलित !


जून १५, २०१९

कडाईके कारण ‘संपूर्णानंद संस्‍कृत विश्‍वविद्यालय’में तीन दशक पश्चात नूतन सत्र निर्धारित समय जुलाईसे आरम्भ होगा । इसके लिए विश्‍वविद्यालय प्रशासनने तैयारियां पूरी कर ली हैं । प्रवेश प्रक्रिया १० जुलाईतक पूर्ण हो जाएगी । इस सत्रमें छह नूतन पाठ्यक्रम आरम्भ करनेको भी स्वीकृति मिली है । संपूर्णानंद संस्‍कृत विश्‍वविद्यालयमें तीन दशकसे अक्‍टूबरसे पढाईका सत्र आरम्भ होता था ।

विश्‍वविद्यालयके कुलाधिपति और राज्‍यपाल राम नाईकका विश्‍वविद्यालयोंमें सत्र नियमित करनेपर बल देनेका प्रभाव है कि इस वर्ष सत्र जुलाईसे प्रारम्भ होगा । कुलपति प्रफेसर राजाराम शुक्‍लाने बताया कि सत्र नियमित करनेके लिए पिछले सत्रकी परीक्षाओंको समयसे पूरा करानेके पश्चात उनका परिणाम घोषित कर दिया गया है ।

कार्यक्रमके अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है । छात्र विश्‍वविद्यालयके जालस्थलपर जाकर आवेदन कर सकते हैं ।

विश्‍वविद्यालयमें ज्‍योतिष, कर्मकांड, वास्‍तु, योग, शास्‍त्रीय संगीत और संगणक (कंप्‍यूटर) पाठ्यक्रम नूतन सत्रमें आरम्भ होगा । इसमें तीन डिप्‍लोमा और तीन सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम होंगे । इसके अतिरिक्त काशीकी शास्‍त्रार्थ पंरपराको आगे बढानेके लिए योजना सज्ज है । नेपालसे शैक्षणिक आदान प्रदानकी तैयारी हो चुकी है । अब मॉरिशस, भूटान और इटलीके साथ भी ‘एमओयू’ शीघ्र हस्ताक्षर किया जाएगा ।

संपूर्णानंद संस्‍कृत विश्‍वविद्यालयमें मानव संसाधन विकास केंद्रके (अकैडमी स्‍टाफ कॉलेज) लिए प्रस्‍ताव यूजीसीको भेजा गया है । यूजीसीसे सकारात्‍मक संकेत मिलनेसे प्रस्‍तावको शीघ्र स्वीकृति मिलनेकी संभावना है । स्‍वीकृति मिली तो यह संस्‍कृत विश्‍वविद्यालयमें देशका प्रथम केंद्र होगा ।

“संस्कृत विश्वविद्यालयके कुलपतिको साधुवाद, जो सम्पूर्ण भारतीय पुरातन ज्ञानको शिक्षामें समाविष्ट कर रहे हैं । आनेवाले कालमें ऐसे विश्वविद्यालय और बढेंगें और छात्रोंको भारतीय विद्याओंका ज्ञान भी मिल सकेगा । ” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : नभाटा



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