धर्मके पतनका कुप्रभाव कलाके क्षेत्रमें भी स्पष्ट दिख रहा है!


धर्मके पतनका कुप्रभाव कलाके क्षेत्रमें स्पष्ट रूपसे देखा जा सकता है | पूर्वकालमें चित्रपट जगतमें आदर्श एवं वीर नारियोंपर चित्रपट बनाये जाते थे, अब आपराधिक चरित्रवाली एवं समाजको दिशाहीन करनेवाली भ्रष्ट एवं अपराधी प्रवृत्तिवाले नर एवं नारियोंके चरित्रपर चित्रपट बनने लगे हैं | राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही चरित्रवाले कुख्यात अपराधी दाऊद इब्राहीमकी बहन हसीना जो स्वयं भी आपराधिक चरित्रकी थी उसके विषयमें चित्रपट बनाया गया, यह तो मात्र एक उदाहरण है, ऐसे कितने ही चित्रपट आज बन चुके हैं या बन रहे हैं जिसमें अपराध और अपराधी दोनोंको गौरान्वित कर प्रस्तुत किया जाता है जिस कारण आजका समाज दिशाभ्रमित होकर अपराधकी ओर प्रवृत्त हो रहा है !     समाजके आदर्श परिवर्तित कर, उसे दिशाहीन एवं पथभ्रष्ट करनेवाले, निकृष्ट एवं आसुरी मानसिकतावाले ऐसे चित्रपट जगतके ऐसे सभी व्यक्ति जो इसमें संलग्न हैं एवं जो इसकी मूक सहमती देते हैं वे अपने पापकर्मको बढाकर, अपने उद्योगके नाशकी पूर्व सिद्धता कर रहे हैं और आश्चर्य न करें यदि ऐसे चित्रपटोंको या उसके कलाकारों या उनके निर्देशकोंको राष्ट्रीय पुरस्कारसे सम्मानित किया जाता हो ! इसीको तो अंधेर नगरी चौपट राजा कहते हैं !



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