नामजप कल्पतरु है । उससे भक्त जो चाहता है, वह प्राप्त होता है । ऐसा कोई कार्य नहीं जो भगवानके नामके आश्रय लेनेपर न हो ! ऐसा कोई पदार्थ या स्थिति नहीं, जिसे नामका आश्रय दिला न सके !; इसलिए नामका आश्रय लेकर किसी सांसारिक कामनाका पोषण न करके संसारके आवागमनसे मुक्ति एवं भगवानसे एकरूपताकी प्राप्ति ही लक्ष्य होना चाहिए । भगवन्नाम मनुष्यका पथ-प्रदर्शक, प्रकाश-स्तम्भ, अपार शक्ति-सम्पन्न और भवसागरसे पार उतारनेवाला है ।
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