निधर्मियोंको प्रखर उत्तर, जैन मुनि तरुण सागरपर आपत्तिजनक ‘ट्वीट’ करनेपर पूनावाला-ददलानीपर २० लाखका अर्थदण्ड !!


मई १, २०१९


सामाजिक जालस्थलपर (सोशल मीडियापर) धार्मिक व्यक्तियोंको लक्ष्य बनानेवालोंको कडा सन्देश देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयने बॉलिवुड गायक विशाल ददलानी और राजनैतिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावालापर २० लाख रुपयेका अर्थदण्ड (जुर्माना) लगाया है । इन दोनोंपर जैन मुनि तरुण सागरके विरुद्घ आपत्तिजनक ‘ट्वीट’ करनेका आरोप है ।


न्यायालयने कहा है कि ददलानी और पूनावालाने ऐसा ख्याति पानेके लिए किया था । न्यायालयने साथ ही २०१६ में ददलानी और पूनावालाके विरुद्घ अम्बाला पुलिसद्वारा प्रविष्ट कराई गई प्राथमिकीको (एफआईआरको) निरस्त कर दिया । न्यायालयने दोनोंपर १०-१० लाख रुपयोंका अर्थदण्ड लगाते हुए टिप्पणी की, “गत वर्षोंमें सामाजिक जालस्थलपर (सोशल मीडियापर) भडकाऊ लेखोंकेद्वारा देशमें कई हिंसक प्रदर्शन हुए हैं । इससे बृहद स्तरपर सार्वजनिक सम्पत्तिको हानि हुई है ।
यद्यपि जैन मुनि तरुण सागरके अहिंसा, त्याग और क्षमाके उपदेशोंसे ऐसी घटनाओंमें न्यूनता आई है ।”


न्यायाधीश अरविंद सांगवानने अर्थदण्डका आदेश देते हुए कहा, “आगेसे वे (ददलानी और पूनावाला) ‘ट्विटर’ जैसे माध्यमपर किसी धार्मिक मतके प्रमुखका केवल ख्याति पानेके लिए उपहास न करें, यह सुनिश्चित करनेके लिए दण्डात्मक कार्यवाही की गई है ।” इसके साथ ही न्यायाधीशने ददलानी और पूनावालाकी ओरसे प्राथमिकीको निरस्त करनेकी याचिकाको स्वीकार कर लिया ।


परिवादके अनुसार ददलानी और पूनावालाने हरियाणा विधानसभामें २६ अगस्त २०१६ को जैन मुनिद्वारा दिए गए उपदेशका उपहास किया था । उन्हें राज्यकी मनोहर लाल खट्टर शासनने विधानसभाको सम्बोधित करनेके लिए बुलाया था । इस कार्यक्रमके पश्चात ददलानी और पूनावालाने जैन मुनिके विरुद्घ आपत्तिजनक ‘ट्वीट’ किए थे । इसके साथ ही हरियाणा विधानसभाद्वारा किसी धार्मिक व्यक्तिको राजनैतिक मंचपर बुलाए जानेको लेकर प्रश्न किए गए थे ।

 

“गत वर्षोंमें धार्मिक व्यक्तियोंको, विशेषतः हिन्दू या इससे सम्बन्धित पन्थोंको लक्य बनानेका चलन बढा है । धर्महीन लोग ख्याति पानेके लिए या अल्पबुद्धिके ज्ञानके परिणामस्वरूप धार्मिक व्यक्तियोंको अपमानित करते हैं, जबकि इन्हीं लोगोंको मस्जिदकी अजान व जिहादमें और गिरिजाघरोंके धर्मान्तरणमें दिव्य सन्देश दिखता है ! ऐसेमें न्यायालयका निर्णय अवश्य ही प्रशंसनीय है, इससे अनर्गल बोलनेवाले हतोत्साहित होंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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