न्यायालयका अधर्मियोंको तर्कसंगत व सराहनीय उत्तर, वर्षा हेतु यज्ञ करनेसे नहीं रोक सकते, लोगोंकी आस्थाओंको तोड़ना हमारा कार्य नहीं !


२० अगस्त २०१३ को ‘अंनिस’के अध्यक्ष नरेन्द्र दाभोलकर हत्या प्रकरणमें सीबीआई अधिकारी नंदकुमार नायरने हिन्दू विधिज्ञ परिषदके सचिव अधिवक्ता संजीव पुनाळेकर और परिषदके सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्री. विक्रम भावेको नियमबाह्य पद्धतिसे बंदी बनाया है । उल्लेखनीय है कि नायरने सनातन संस्था, सनातनके साधक और अन्य हिन्दुत्वनिष्ठोंको झूठे अपराधमें फंसानेके लिए अनेक प्रकारके षड्यन्त्र किए हैं । उनके विरुद्ध समय-समयपर हिन्दू विधिज्ञ परिषदके राष्ट्रीय सचिव अधिवक्ता संजीव पुनाळेकरजीने पीडितोंकी ओरसे प्रधानमन्त्री, केन्द्रीय दक्षता आयोग, सीबीआईके संचालक आदिके पास प्रमाणसहित पत्र भेजे थे; फलस्वरूप, नंदकुमार नायरने अधिवक्ता पुनाळेकरजीको ही दाभोलकर हत्या प्रकरणमें फंसानेके लिए आरोपी सचिन अंदुरेपर दबाव डाला ।

गोवा, रामनाथीमें अष्टम हिन्दू अधिवेशनमें उपस्थित अनेक अधिवक्ताओं और हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनोंने भावेजीको और पुनालेकरजीको जानबूझकर फंसानेका आरोप लगाया कि गडकरी रंगायतन विस्फोट प्रकरणसे निर्दोष छूटे सनातनके साधकोंको पुनः फंसानेके लिए एक स्टिंग ऑपरेशनका षड्यन्त्र रचा गया । उसके लिए एक राष्ट्रीय समाचारवाहिनीके कुछ पत्रकारोंको नायरने उन साधकोंके पते और दूरभाष दिए । इस बातका भी उल्लेख केन्द्र शासनको सितम्बर २०१८ में प्रेषित परिवादपत्रमें किया गया है । इस पत्रका केन्द्र शासनने संज्ञान लिया है । कुल मिलाकर देखें, तो मुम्बई उच्च न्यायालयकी ओरसे निरन्तर मिलनेवाली कडी डांट-फटकार आदिके कारण नंदकुमार नायरने पुनाळेकरजीको षड्यन्त्रपूर्वक फंसाया है । सम्मेलनमें सर्वाच्च न्यायालयके अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, बेंगळूरु उच्च न्यायालयके अधिवक्ता अमृतेश एन.पी. एवं अन्य अधिवक्ताओंने पत्रकारोंको सम्बोधित करते हुए सीबीआईका झूठ उजागर करनेवाले निम्न सूत्र प्रस्तुत किए :

१. दाभोलकर प्रकरणके आरोपी शरद कळसकर कह रहा है कि ‘अधिवक्ता संजीवजीने दाभोलकर हत्यामें प्रयुक्त पिस्तौल खाडीमें फेंकनेके लिए मुझे कहा था ।’  प्रत्यक्षमें वह पिस्तौल खाडीसे पुनः प्राप्तकर उसे प्रयोगशालामें जांचकर, फिर उसी पिस्तौलसे गोली लगनेकी बात जब तक सिद्ध नहीं होती, तबतक यह नहीं कहा जा सकता कि पिस्तौल नष्ट कर दी गई; इसलिए ‘हत्यामें प्रयुक्त पिस्तौलें अथवा शस्त्र नष्ट करनेके लिए कहनेका’, आरोप ही निराधार है !

२. दूसरी ओर अक्टूबर २०१८ में शरदके पास अनेक बम मिले; इसलिए उसे बंदी बनाया गया था । तदोपरान्त केवल अधिवक्ता पुनाळेकरजीके कहनेपर कळसकरने अपने बचावके लिए केवल दाभोलकर हत्याकी पिस्तौलें नष्ट की और शेष पिस्तौलें तथा बम अपने पास इसलिए सम्भालकर रखे कि ‘एटीएस’ आकर उसे पकडें ? कोई भी आरोपी कभी ऐसा कर सकता है ?

३. अधिवक्ता और आरोपीके मध्यका सम्भाषण निजी होता है तथा यह अधिवक्ताका विशेष अधिकार होता है । उसीको यदि कल अपराध मानने लगेंगे, तो कोई भी वैधानिक परामर्श देनेवाले अधिवक्ताआेंको धमकाकर उसे शुल्क देनेसे मना कर सकता है ।

४. आरोपी शरदको अक्टूबर २०१८ में बंदी बनाया गया । उस प्रकरणमें सीबीआईने फरवरी २०१९ में आरोपपत्र प्रस्तुत किया । अधिवक्ता पुनाळेकरजीको २६ मई २०१९ को बंदी बनाया जाता है । कुल ८ माह पूर्व जानकारी होनेपर भी सीबीआईवाले क्यों रुके रहे ? लोकसभा चुनावके पश्चात यह कार्यवाही करनेका अर्थ है, यह एक बडा और सुनियोजित षड्यन्त्र है ।

५. ‘हमारे पास प्रमाण हैं’, ऐसा कहनेवाली सीबीआई आरोपियोंको बंदी बनानेके पश्‍चात अभियोग चलानेका साहस क्यों नहीं दिखाती ?

६. हिन्दू विधिज्ञ परिषदके सूचना अधिकार कार्यकर्ता श्री. विक्रम भावेने ‘भगवे आतंकवाद’का भांडा फोडनेवाले ‘मालेगांव बम-विस्फोटके पीछेके अदृश्य हाथ’ यह पुस्तक लिखनेसे आतंकवाद विरोधी पथकके अनेक अधिकारियों अथवा कांग्रेसका खरा स्वरूप समाजके समक्ष उजागर किया । इसके साथ ही कम्युनिस्टोंके अनेक भ्रष्टाचार उजागर किए हैं; इसीलिए श्री. भावेको भी जानबूझकर इस प्रकरणमें फंसाया गया है ।

अधिवक्ताआेंने पुनाळेकरजी एवं श्री. भावेको बंदी बनाए जानेके विरोधमें प्रस्ताव सर्व सम्मतिसे पारित किया । सीबीआईके इस कार्यके विरोधमें नांदेड अधिवक्ता संघकी ओरसे न्यायालयका कार्य बंद रखा गया ।

आतंकवादियोंकी वैधानिक सहायता करनेके लिए सदैव तत्पर रहनेवाले राष्ट्रद्रोही नेता, अधिवक्ता और पत्रकारोंको बंदी नहीं बनाया जाता; परन्तु हिन्दू धर्मकी रक्षाके लिए लडनेवाले अधिवक्ता पुनाळेकरजी और भावेजीको बंदी बनाया जाता है ! इस विषयमें सामाजिक प्रचारमाध्यमोंमें अभियान चलाया जाना चाहिए । इन्होंनें अनेक वर्षाेंसे हिन्दू समाजकी नि:स्वार्थ भावसे सेवा की है ! सभी हिन्दू; फेसबुक, व्हाट्सएपके साथ आंदोलनके माध्यमसे श्री. पुनाळेकर एवं श्री. विक्रम भावेको बंदी बनाए जानेका निषेध करें, साथ ही उनके साथ अंततक दृढतासे खडे रहकर उनकी सहायता करें ।



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