पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंके लक्ष्यपर था कुम्भ मेला, आक्रमणकी आशंकासे बढी सतर्कता !!


दिसम्बर २७, २०१८

राजधानी देहली और उत्तरप्रदेशके अमरोहासे पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंके लक्ष्यपर कुम्भ मेला भी था ! इसकी आशंकाने आतंक निरोधी दल (एटीएस) सहित अन्य सुरक्षा विभागोंकी बेचैनी बढा दी है । ‘एटीएस’ इस दिशामें अब और गहनतासे अन्वेषणमें लग गई है । पकडे गए संदिग्ध आतंकियोंसे इस दिशामें भी पूछताछ की जाएगी । कुम्भ मेलेमें किसी आतंकी घटनाके षडयन्त्रको लेकर पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है । आतंकियोंके साधुकी वेशभूषामें कुम्भकी सुरक्षा-व्यवस्थामें सेंध लगानेकी आशंका भी गुप्तचर विभाग प्रकट कर चुका है । ऐसेमें अमरोहा, मेरठ व लखनऊमें ‘आइएस’के नूतन ‘मॉड्यूल’ ‘हरकत-उल हर्ब-ए-इस्लाम’के संदिग्ध आतंकियोंकी सक्रियता सामने आनेके पश्चात उनकी योजनाओंको लेकर बडे प्रश्न खडे हो रहे हैं ।


‘एनआइए’के साथ संयुक्त कार्यवाहीके लिए ‘एटीएस’के ‘एसएसपी’ विनोद कुमार सिंह व ‘डिप्टी एसपी’ अतुल यादवको लगाया गया है । प्रथम बार ‘एटीएस’के दलमें प्रशिक्षित किए गए ४२ सैन्य बल भी अभियानमें लगाए गए हैं । भिन्न-भिन्न स्थानोंपर छापेके समय सैन्य बल भी सक्रिय भूमिकामें हैं ।

इस मध्य देहली और उत्तरप्रदेशमें हुई संदिग्ध गिरफ्तारीका लखनऊ सम्पर्क भी सामने आया है । बुधवारको एनआइए व एटीएसकी संयुक्त दलने ‘हरकत-उल हर्ब-ए-इस्लाम’ संगठनके जिन संदिग्ध आतंकियोंको बन्दी बनाया है, उनका लखनऊसे सम्पर्क है ।
यह बात सामने आई है कि सिटी स्टेशनके पास रहने वाली एक महिलाने अपने आभूषण विक्रयकर संदिग्ध आतंकियोंको लगभग पौने तीन लाख रुपये दिए थे !

 

“तो अब धर्मान्ध व जिहादी हिन्दू देवालयके साथ हिन्दुओंके उत्सवपर भी लक्ष्य निर्धारण करने लगे हैं ! इसका समाधान करना अत्यन्त आवश्यक है, अन्यथा यह राष्ट्रके लिए हितकारी सिद्ध नहीं होगा और यह सोचना भी अत्यावश्यक है कि ऐसे हिन्दू विरोधी प्रकरणके पीछे धर्मान्ध ही क्यों होते हैं ? यह अवश्य विचारणीय है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जागरण



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