पुलिसने कहा, मरम्मा मन्दिरके महंतने ही प्रसादमें मिलाया था विष !!


दिसम्बर २०, २०१८

पुलिसने कर्नाटकके चामराजनगर जनपदमें एक मन्दिरके प्रसादमें विष मिलानेकी घटनाके सम्बन्धमें स्थानीय महन्तको बन्दी बनाया गयख ।  इस घटनामें १५ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी । चामराजनगर जनपदके अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एम.एस. गीताने पीटीआईको बताया कि महादेश्वर हिल सालुरु मठके महन्त पीआई महादेवस्वामीको बन्दी बनाया गया है । उनकी इस घटनामें भूमिका थी !

चामराजनगरके अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एम.एस. गीताने कोई और जानकारी देनेसे मना कर दिया । पुलिस सूत्रोंने बताया कि महन्त और एक महिला सहित कमसे कम पांच लोगोंकी इस घटनामें सीधी भूमिका है ।

अधिकारियोंने १५ दिसम्बरकी इस घटनाको लेकर अभी तक ११ लोगोंसे पूछताछ की है । उल्लेखनीय है कि चामराजनगरके हानुर तालुकके सुवावाडी गांवमें मरम्मा मंदिरमें प्रसाद खानेके पश्चात १२० से अधिक लोग रूग्ण हो गए थे । घटनाके दिवस ही नौ लोगोंकी मृत्यु हो गई थी जबकि छह लोगोंकी उसके पश्चात चार दिनोंमें मृत्यु हो गई थी । २७ लोगोंकी स्थिति अब भी गम्भीर बनी हुई है । प्रयोगशालामें हुई जांचके समय प्रसादमें कीटनाशक पदार्थ पाए गए । पुलिसको सन्देह है कि राजस्व विभाजनको लेकर मंदिरके प्रबंधनसे क्रुद्ध एक गुटने प्रसादमें विष मिलाया होगा ।

कर्नाटक पुलिसके (साउथ जोन) आईजी केवी शरत चन्द्रने बताया कि ५२ वर्षीय महंत और उसके साथियों एक महिला, उसके पतिके साथ उसके मित्रको आईपीसीकी धाराओंके अन्तर्गत बन्दी बनया गया है । उन्होंने कहा कि महादेश्वर हिल सालुरू मठ महंत पी.आई. महादेश्वर स्वामीने न केवल मंदिरपर नियन्त्रण करने वरन् न्यासके सदस्योंकी छवि खराब करनेका षडयन्त्र रचा ।

आईजीने बताया कि महन्त २०१७ तक मंदिर न्यासके नियन्त्रणमें थे, परन्तु बादमें उनकी अनदेखी कर दी गई जिससे वह क्रुद्ध हो गए । उन्होंने बताया कि महंतकी ओरसे ३५ वर्षीय महिलाने कथित रूपसे कीटनाशकका प्रबन्ध किया और उसके पति तथा मित्रने प्रसाद बनाते समय उसमें विष मिलाया ।

 

“दुखद है कि धर्माभिमान न होनेके कारण देवालय देवताके निवास स्थानके स्थानपर अब आपसी झगडोंका केन्द्र बन गए हैं, जिसका लाभ देवालयोंका नियन्त्रण चाहने वाले शासन व मिशनरियोंको मिलता है ! मिशनरियां ऐसे प्रकरणके पश्चात प्रचार करती है कि देखो ! तुम्हारा भगवान कुछ न कर सका, इसलिए यीशुकी शरणमें आओ और साथमें धनका लालच देती है; इन्हीं सभ परिस्थितियोंके कारण ही आज सनातन धर्मकी विडम्बना हो रही है; अतः अब पूर्ण नव निर्माणकी आवश्यकता है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जागरण



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