भगवान रामकी प्रतिमा चुरानेवाला स्वयं आया लौटाने, बोला, आ रहे थे भयावह स्वप्न !


रामजन्मभूमि थाना क्षेत्रके नजरबाग मोहल्लेमें स्थित माधुरीकुंजसे १४० वर्ष प्राचीन अष्टधातुसे बनी भगवान रामकी प्रतिमा चोरी होनेके ठीक ५वें दिवस वापस मिल गई है; परन्तु यह समूचा प्रकरण रोचक है । गत सोमवार, २७ मईको चोर प्रतिमाको चुराकर ले गया था और शुक्रवार, ३१ मईको दोपहरमें स्वयं ही भागा-भागा प्रतिमा लौटाने मंदिर पहुंच गया । चोर अजयका कहना है कि जबसे चोरी की, तबसे उसके शरीरमें विचित्र प्रकारकी वेदना आरम्भ हो गई है । उसको घबराहटके साथ भयावह स्वप्न आ रहे हैं । वह प्रतिमाको अधिक दिनोंतक अपने साथ रख नहीं पाया और स्वयं युगल माधुरी कुंज मंदिरमें पहुंच मन्दिरके पुजारीको भगवान रामकी प्रतिमा सौंप दी । प्रतिमा सौंपनेके पश्चात उसके शरीरकी वेदना तो ठीक हो गया; परन्तु वह पुलिसके हत्थे चढ गया । पुलिसने चोर अजय शुक्लाको बन्दी बनाकर करावास भेज दिया है ।

गत सोमवारमेंं मन्दिरके गर्भगृहका ताला तोडकर ९ इंचकी अष्टधातुसे बनी भगवन रामकी प्रतिमा चोरी हो गई थी । महन्त राजबहादुर शरणने बताया कि यह भगवानकी दिव्य शक्ति ही है कि दोपहरमें भगवानको भोग लगानेके पश्चित जैसे ही मन्दिरके गर्भगृहसे बाहर देखा तो एक व्यक्ति खडा था, उसने कहा कि आपके यहांसे कोई प्रतिमा ओझल हो गई है क्या ? उत्तरमें मैंने हां कहा । तो वह बोला कि मैं वहीं प्रतिमख लौटाने आया हूं ।

महंतने आगे बताया कि जैसे ही उस युवकसे प्रतिमा दिखानेके लिए कहा कि उसने हमारे ठाकुरजीको हमारी गोदमें रख दिया । चोरीकी घटना कैसे हुई ?, यह पूछे जानेपर आरोपी अजयने बताया कि उसने ताला तोडकर प्रतिमा चुराई थी । वह प्रतिमाको अपने साथ घर ले गया था । घरवालोंने इस बातका विरोध किया था । चोरने महंतको बताया कि चोरीकी रातसे नींद नहीं आ रही है और पूरा शरीर अकडने लगा है, इसीलिए प्रतिमाको वापस करने पहुंच गया ।

चोरने महंतसे अनुरोध किया था कि यह बात पुलिसको न बताए; परन्तु घटनाकी जानकारी पुलिसको दी गई । पुलिसने चोरको बन्दी बना लिया है ।

“यह उन अधर्मियोंके लिए सीख है, जो ईश्वर पत्थरकी प्रतिमा नहीं होती या ईश्वय होता ही नहीं या तुम्हारा भगवान स्वयंकी रक्षा नहीं कर सकता है तो तुम्हारी क्या करेगा आदि इसप्रकारके कुतर्क करते हैं । ईश्वर ये लीलाएं दिखा रहा है ताकि सभी लोग उसकी शक्तिको पहचाने और धर्मका पालन करे । सभी हिन्दू अब इससे सीख लेकर ईश्वरीय शक्तिको पहचाने और धर्मपालन करें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ



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