जनवरी ९, २०१९
पाकिस्तान एक ओर तो भारतसे सम्बन्ध सुधारनेकी बात करता है; परन्तु कश्मीरको अशांत रखनेका वो पुरजोर प्रयास भी करता है । पाकिस्तानको भारतीय कार्यक्रमोंसे भी परेशानी है । पाकिस्तानके शीर्ष न्यायालयको लगता है कि भारतीय धारावाहिकके विषयके कारण पाकिस्तानकी संस्कृति संकटमें हैं, पाकिस्तानके मुख्य न्यायाधीश शाकिब निसारकी कमसे कम यही सोच है ।
शाकिब निसारने कहा कि शीर्ष अदालत भारतीय कार्यक्रमोंको पाकिस्तानमें दिखानेकी आज्ञा नहीं देगा । ‘पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी’ने उच्च न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध शीर्ष न्यायालयमें याचिका की थी । ‘डॉन’के अनुसार उच्च न्यायालयने भी भारतीय कार्यक्रमोंको पाकिस्तानके लिए संकट माना था । न्यायालयने कहा कि विदेशी विषय पाकिस्तानके सन्दर्भमें नहीं होते हैं । पाकिस्तानकी संस्कृतिको भी उचित ढंगसे प्रस्तुत नहीं किया जाता है ।
पेम्राके अधिवक्ता जफर इकबाल कालानौरीने तीन सदस्यों वाली पीठके समक्ष कहा था कि उच्च न्यायालयके आदेशसे पूर्व ही विदेशी विषयोंको प्रतिबन्धित किया जा चुका था ।
“हास्यास्पद है कि जहां एक ओर पाकिस्तान भारतके सभी धारावाहिक प्रतिबन्धित कर रहा है, तो दूसरी ओर भारतीय चलचित्र जगतमें तथाकथित बुद्धिजीवी पाकिस्तानी नटोंसे ही सब काम करवाकर उन्हें आगे ला रहे हैं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : टाइम्स नाउ न्यूज
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