मार्च १५, २०१९
भारत और म्यांमारकी सेनाओंने म्यांमारके क्षेत्रमें उग्रवादियोंके विरुद्घ १७ फरवरीसे दो मार्चतक समन्वित अभियानमें उनके १२ स्थलोंको नष्ट कर दिया । यह अभियान ‘कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परिवहन परियोजना’पर संभावित संकटको टालनेके लिए चलाया गया । इस अभियानमें १२ सहस्रसे अधिक भारतीय सैनिकोंने भाग लिया ।
सेनाके वरिष्ठ अधिकारीने सीमा पार जाकर कार्यवाही करनेके समाचारोंसे मना किया । उन्होंने बताया कि भारतीय सेनाने इस अभियानके समय सीमा पार नहीं की । अधिकारीने बताया कि अभियानका उद्देश्य म्यांमारके उग्रवादी समूह ‘अराकान आर्मी’के सदस्योंपर कार्यवाही करना था । गत समयमें म्यांमार सीमामें दक्षिणी भागमें अत्यधिक संख्यामें ‘असम राइफल्स’की टुकडी तैनात की गई थी ।
‘असम राइफल्स’ने म्यांमार सेनाके साथ मिलकर उग्रवादियोंके विरुद्घ यह कार्यवाही की । उग्रवादी म्यांमारमें कालादान परियोजनापर काम कर रहे भारतीय कर्मियोंको आक्रमणकी चेतावनी देकर पैसे ऐंठनेका प्रयास कर रहे थे । यह परियोजना भारतद्वारा वित्तपोषित है । अधिकारीने बताया कि अभियानके समय भारतीय सेनाने नगालैंड और मणिपुरसे लगी सीमाके पास सुरक्षा बढाई ताकि उग्रवादी भारतकी ओर नहीं आ सकें ।
सेनाके अधिकारीने बताया कि अभियानके समय म्यांमारकी सेनाको हमने सैन्य सामग्री उपलब्ध कराए । इसके अतिरिक्त भारतने म्यांमार सेनाको रेडियो भी दिए ताकि अभियानके समय दोनों सेनाओंमें सम्पर्क रहे और किसी भी सम्भावित संकटसे बचा जा सके ।
कालादान परियोजना :
कालादान परियोजनाका उद्देश्य भारत और म्यांमारको समुद्र और भूमिके रास्तेसे जोडना है । म्यांमारकी कालादान परियोजनाके वर्ष २०२० तक आरम्भ होनेकी आशा प्रकट की जा रही है । ४८४ मिलियन डॉलरकी लागत आएगी इस परियोजनापर, यह धन भारत व्यय करेगा ।
सेनाके अधिकारीने बताया कि इसके मध्य म्यांमार सेनाका एक सैनिक आईईडी विस्फोटकसे गम्भीर रूपसे चोटिल हो गया । इस मध्य उन्होंने दो भारतीय सैनिकोंके हुतात्मा होनेके समाचारोंको भी नकार दिया ।”
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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