जून २७, २०१९
ओडिशाका मांझी और ‘कैनाल मैन’ कहे जानेवाले आदिवासी किसान दैतारी नायक अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाना चाहते हैं । उनका मानना है कि उनके जीवित रहनेके रास्ते बंद हो चुके हैं !
दैतारी नायकने ७० वर्षकी आयुमें अपने गांवके किसानोंकी सिंचाईके लिए तीन वर्षमें पहाडसे ३ किलोमीटर लंबी नहर खोद दी थी ! उनके इस कार्यकी चर्चा देश भरमें हुई । इतना ही नहीं शासनने उनके इस कार्यके लिए उन्हें पद्मश्री भी दिया । ओडिशाके मांझी कहे जानेवाले दैतारी इतना सब करनेके पश्चात भी निर्धनतामें जीवन व्यतीय करनेको विवश हैं । उनका कहना है कि उन्हें देशका चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलनेके पश्चगत लोग उनका आदर तो करते हैं; परन्तु उनको कार्य कोई नहीं देता ।
दैतारीका परिवार अब बुरी परिस्थितियोंका सामना कर रहा है । उनके परिवारका वहन अब चीटिंयोंके अंडे खाकर हो रहा है !! इसी कारण वह अब अपना पुरस्कार वापस करना चाहते हैं ।
ओडिशा टीवीके एक ब्यौरेकी मानें तो जिस नहरको खोदनेके लिए पद्मश्री मिला था, वह उसे पक्का करानेके लिए गत एक वर्षसे प्रशासनसे अनुरोध कर रहे हैं; परन्तु अभीतक कोई सुनवाई नहीं हुई है । दैतारीने बताया कि रुग्ण अवस्थामें उन्हें ५-७ किलोमीटर दूर पैदल चलकर चिकित्सा करवानेके लिए जाना पडता है; क्योंकि उनके गांवमें कोई चिकित्सालय नहीं है । न ही वहां पक्की सडक है ।
दैतारीके पुत्र अलेखा नायकका कहना है कि पहले उनके पिता दिहाडी श्रमिक थे । जबसे शासनकी ओरसे पद्मश्री सम्मान मिला, तबसे काम मिलना बंद हो गया ! लोग उनका सम्मान करते हैं; परन्तु कार्य नहीं देते हैं । लोगोंका मानना है कि हम अब बडे लोग बन गए हैं ।
वहीं दैतारीके गांवके ही रहनेवाले एक व्यक्तिका कहना है कि पुरस्कारसे न ही दैतारीका कोई उद्देश्य पूर्ण हुआ और न ही गांवका, सब पहले जैसा ही है ! जब उन्हें पद्मश्री मिला था तो सबको लगा था कि गांवमें विकासका कार्य होगा; परन्तु यहांकी स्थिति पहले जैसी ही है । भयके कारण कोई दैतारीको काम भी नहीं देता !
एक भ्रष्ट और लचर लोकतान्त्रिक व्यवस्थाका सबसे सटीक उदाहरण है दैतारी ! जो कार्य शासकगणोंको करना चाहिए, वह एक ७० वर्षीय वृद्ध कर रहा है और उसके पश्चात भी गांव और उनकी यह स्थिति हमारू भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्ट व्यवस्थाको ही उजागर कर रही है और यह व्यवस्था परिवर्तनकी ही अब आवश्यता है । “- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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