२५ अप्रैल, २०२०
पालघरमें ‘मॉब लिंचिंग’ घटनापर जांचसे ज्ञात हुआ है कि यहां मद्यपानका व्यापार तथा ‘ईसाई मिशनरियों’द्वारा लोगोंका धर्मान्तरण करनेका प्रकरण चल रहा है । इसमें गत कुछ माहसे वृद्धि हुई है तथा इन सभी कार्योंको राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त है ! यहां रावणकी भी पूजा की जाती है । साधु-सन्तोंद्वारा इनका विरोध करनेपर उनसे शत्रुता निकाली जाती है । ‘मॉब लिंचिंग’की घटनापर प्रत्यक्षदर्शी गढ -चिचले गांवकी सरपंच चित्रा चौधरीके अनुसार जब वे साधुओंसे बात कर रही थीं तो भीडने एकाएक उन सबपर आक्रमण कर दिया और उन साधुओंके वाहनको पहले ‘पंक्चर’ किया, फिर उल्टा कर दिया । चित्राने बताया कि इस घटनामें उन्हें भी चोटें आईं और वह किसी प्रकार भागकर अपने घर पहुंचनेमें सफल रहीं। जबवे रात्रि १२ बजे पुन: ‘चेकपोस्ट’के पास पहुंची तो उन्होंने देखा कि वहां दोनों साधुओं और वाहन चालकके शव पडे हुए थे । वे पुलिसके आने तक किसी प्रकार भीडको नियन्त्रित करना चाहती थी; परन्तु पुलिस विलम्बसे पहुंची । इस घटनाको लेकर तीन दिन पश्चात लोगोंको पता चला, जब वीडियो प्रसारित हुआ। न केवल ‘मीडिया’ अपितु पालघर पुलिसने इस घटनाको दबानेका भरसक प्रयास किया ।
_राजनैतिक संरक्षणमें जब धर्मान्तरण तथा साधुओंकी निर्मम हत्या जैसै कृत्य होंगे तो न्यायकी आशा कैसे करें ? अब हिन्दुओंको ही इस कथित धर्मनिरपेक्षताका राग आलापना छोडकर एकजुट होकर इन सबका विरोध करना होगा तथा हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु अग्रसर होना होगा ! – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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