फरवरी २४, २०१९
मद्रास उच्च न्यायालयने शुक्रवार, २२ फरवरी, २०१९ अन्तरको बताते हुए भारतीय जनता पार्टीके एक कार्यकर्ताको प्रतिभूति (जमानत) दे दी । कार्यकर्ता रंगास्वामीने अपने एक ‘फेसबुक’ लेखमें पैगम्बर मुहम्मदके विरुद्घ गत वर्ष कथित रूपसे ‘ईशनिंदा’ सम्बन्धित लेख लिखा था ।
४९ वर्षीय भाजपा कार्यकर्ताको चेन्नईमें चितलपक्कम पुलिसने सामाजिक प्रसार माध्यमके माध्यमसे ‘घृणा’ प्रसारितके आरोपमें बन्दी बनाया था । कल्याणसुन्दरम रंगास्वामीपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक फेसबुक लेखकेद्वारा मुसलमानोंकी भावनाओंको आहत किया है । रंगास्वामीपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने पैगंबर मुहम्मदपर कुछ टिप्पणी की थी । जैसे ही वह अहमदाबादसे चेन्नई पहुंचे, उन्हें ‘साइबर पुलिस’ने पूछताछके लिए पकडा और बादमें न्यायालयमें प्रस्तुत किया गया, जहांसे रंगास्वामीको न्यायिक हिरासतमें भेज दिया गया ।
न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेशने रंगास्वामीद्वारा किए गए फेसबुक लेखकी समीक्षा करनेके पश्चात कहा, “इस न्यायालयके विचारमें, याचिकाकर्ताने पैगंबर मुहम्मद और उनके परिवारके बारेमें अपनी समझके अनुसार प्रासंगिक इतिहास पढनेके पश्चात ही लिखा है; इसलिए वो प्रतिभूतिके अधिकारी हैं और वह जांचमें सहयोग करेंगे ।”
ज्ञात हो कि यह ‘आपत्तिजनक पोस्ट’ ख्रिस्राब्द २०१५ में लिखा गया था । यह प्रकरण इस कारण भी रोचक है; क्योंकि चितलपक्कमके उप-निरीक्षक डी सेल्वमणिने इस ‘फेसबुक पोस्ट’को संज्ञानमें लिया था और अपने वरिष्ठ अधिकारियोंको जानकारी दी थी । सेल्वमणिने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’को बताया, “मैंने फेसबुकपर उसकी खोज की और अपमानजनक टिप्पणियां पाईं, जो मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारियोंको दिखाई, उन्होंने ही मुझे इस प्रकरणमें परिवद देनेके लिए कहा ।”
इस मध्य, एमएमके नेता एमएच जवाहिरुल्लाहने कहा कि रंगास्वामीको ३० दिसम्बरको पुलिस आयुक्तने उनकी परिवादके पश्चात बन्दी बनाया था । जबकि सेल्वमणि और नेता एमएच जवाहिरुल्लाहके मध्य इस ‘आपत्तिजनक पोस्ट’को संज्ञानमें लिए जानेके नामको लेकर विवाद भी हुआ कि किसकी सक्रियताने रंगास्वामीको एक फेसबुक लेखके लिए बन्दी बनाकर कारावासमें बंद करवाया ।
भाजपा कार्यकर्त्ताके विरुद्घ प्रकरण यह था कि पैगंबर मुहम्मदपर उनकी टिप्पणीसे धार्मिक तनाव उत्पन्न होगा और इस कारण दो धर्मोंके मध्य घृणा और दुर्भावना उत्पन्न होगी ।
“दो धर्मोंके मध्य तनाव उत्पन्न होगा, यह सुन-सुनकर और अनुपालनकर ही आज इस राष्ट्रकी यह स्थिति है । यदि इन सत्योंको मुखर होकर लोगोंको सामने रखा जाता तो सभीको ज्ञात होता कि वास्तविक धर्म क्या है ?; परन्तु हमें धर्मनिरपेक्ष रखा गया और इतना धर्मनिरपेक्ष रखा गया कि राज्यके राज्य मुसलमान बन गए । हमारे सामने अनेकानेक स्त्रियोंका निकाहके नामपर शीलहरण होता रहा और हम स्त्रीपूजक मौन रहें ! ऐसी शान्तिका क्या लाभ, जो संस्कृति व संस्कारोंको ही नष्ट कर दें । सत्य मुखर होकर ही बोलना चाहिए !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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