ममता बैनर्जीका विचित्र कृत्य, कमलके चिह्नको पेंटकर बनाया तृणमूलका चिह्न, बोलीं कार्यालयपर अधिकार हुआ !!


जून ३, २०१९

लोकसभा चुनाव २०१९ समाप्त होनेके पश्चात भी बंगालमें बीजेपी और तृणमूल कांग्रेसके मध्य विवाद न्यून होनेका नाम ही नहीं ले रहा है । जय श्रीराम बोलनेपर हुए हंगामेके पश्चखत अब दोनों ही दलोंके मध्य कार्यालयको लेकर भी मारामारी आरम्भ हो गई है । उत्तर २४ परगना जनपदमें स्वयं ममता बैनर्जी बीजेपी कार्यालय पहुंचीं और वहां लगा ताला खुलवाया । आरोप है कि यहां ममता बैनर्जीने कमलके चिह्नको पेंटकर उसपर तृणमूलका चिह्न बना दिया !! तृणमूल कांग्रेसने दावा किया है कि भाजपाने उनके कार्यालयपर अधिकार किया है ।

केन्द्रीय मन्त्री बाबुल सुप्रियोने कहा है कि आसनसोलसे भारतीय जनता पार्टीके कार्यकर्ता बंगालकी मुख्यमंत्री ममता बैनर्जीको ‘Get Well Soon’का कार्ड भेजेंगें । सुप्रियोने यह टिप्पणी जय श्रीरामके उद्घोषपर ममताकी प्रतिक्रियासे सम्बन्धित प्रश्नपर की ।

सुप्रियोने कहा कि वह (ममता) एक अनुभवी नेता हैं; परन्तु उनका व्यवहार विचीत्र है । वह जिस पदपर हैं, उन्हें उसके सम्मानकी चिन्ता होनी चाहिए । उन्हें कुछ दिनोंके लिए विश्राम करना चाहिए । बंगालमें बीजेपीकी उपस्थितिसे वह उद्विग्न हो गईं हैं ।

ममता बैनर्जीको आडे हाथ लेते हुए देहली भाजपाके नेता प्रवीण शंकर कपूरने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्षको भगवान रामका नाम जपना चाहिए, जिससे उनपर बुरी शक्तियोंका साया दूर करनेमें सहयता मिलेगी । कपूरने कहा कि उन्होंने मुख्यमन्त्रीको ‘भगवान श्रीराम नाम मन्त्र’ भी भेजा है और उसे उनकी मेजपर रखनेको कहा है ।

बीजेपीकी देहली इकाईके प्रवक्ता कपूरने कहा कि रामायणमें स्पष्ट कहा गया है कि जिस भी व्यक्तिके मस्तिष्कपर यदि कोई बुरी शक्तियोंका प्रभाव हो तो इसे ‘भगवान राम’का नाम लेकर समाप्त किया जा सकता है । बग्गाने बताया कि देशभरसे बीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक ममता बैनर्जीको लगभग २५ लाख पोस्टकार्ड ‘जय श्रीराम’ लिखकर भेजेंगें ।

“एक राज्यकी मुख्यमन्त्रीद्वारा किया यह कृत्य सर्वथा अशोभनीय है । ममता बैनर्जी बंगालमें लोकतन्त्रको तो समाप्त कर ही चुकी हैं और अब अराजकतापर उतरकर ऐसे अशोभनीय कृत्य कर रही हैं ! वैसे एकप्रकारसे अछा ही है । ममता बैनर्जीको अब तृणमूलका अन्त दिखने लगा है । उनकी अराजकतासे त्रस्त जनता अब उन्हें उत्तर दे रही है और इसीसे उनकी बंगालकी गद्दी जाना निश्चित है, इसे वे अब हंसके स्वीकार करें या इसप्रकारके कृत्यकर ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ


स्रोत : न्यूज १८



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