५ मई ,२०२०
पत्रकार सारस्वत पाणिग्रहीने राज्य व राष्ट्रीय स्तरपर पुरस्कार विजेता ‘हिन्दूफोबिया’से ग्रसित वामपंथी उडिया कवियोंकी उस प्रवृत्तिकी ओर ध्यान दिलाया है जिसमें उन्होने अपनी कविताओंमें हिन्दू देवी देवताओंका अपमान व अपशब्दोंका प्रयोग किया है । इसमें सुभाश्री सुभाष्मिता मिश्रने सीता माताको ‘वेश्या’, राजेन्द्र किशोर पांडाने ‘रावणसे बलात्कारकी इच्छुक’ ‘अविश्वासी’ व ‘आसानीसे अग्नि परीक्षा पूरा’ करने वाली बताया है । एक अन्य धूर्त प्रदीप कुमार पांडाने ‘रामनवमी’नामक कवितामें’पोर्न’,’अस्पृश्यता’
‘शिक्षाकी कमी’ शब्दोका उपयोग करते हुए हिन्दू देवीके नाममें महिलाओंके ‘यौन शोषण’ और ‘वस्तुकरण’को दर्शाया है । इसके लिए समाजिक जालस्थलोंपर प्रदीप पांडाको कई प्रतिक्रियाएं मिली व केदार मिश्रका समर्थन मिला जिसमें उसने भगवान राम व सीता मांको ‘टी.वी. धारावाहिकके केवल पात्र बोला । पाणिग्रहीने जब अन्य धर्मके रुपकोंके लिए ऐसे व्याख्यान लिखने बोला तो उन्हें ‘ब्लॉक’कर दिया गया । ऐसे तथाकथित कवियोंके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट कराया गया है ।
— आजके निर्धर्मी ,निर्लज्ज कवि धर्म शिक्षाके अभावमें अपने ही हिन्दू देवी देवताओंका अपमान कर रहे हैं और हिन्दू इनसबको सुन भी रहे है । ऐसे सब लोग हिन्दू कहलानेकी पात्रता नही रखते । उडीसा प्रशासनने इन सबको हिन्दू धार्मिक भावनाओंको आहत करनेके लिए कठोर दंड देना चाहिए ,ऐसी हम अपेक्षा रखते है । इसप्रकारके धर्मपर आघातोंको रोकनेके लिए एकमात्र उपाय शीघ्रातिशीघ्र हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही है ।-सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑपइंडिया
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