जून १५, २०१९
बंगालके शासकीय चिकित्सालयके ७०० से अधिक चिकित्सकोंने अपने पदसे त्यागपत्र दे दिया है । ऐसा उन्होंने विरोध कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकोंके प्रति एकजुटता दिखानेके लिए किया । कोलकाता स्थित नील रतन शासकीय चिकित्सालयमें सोमवार, १० जूनको दो कनिष्ठ चिकित्सकोंके साथ हुई मारपीटके पश्चात आरम्भ हुआ विरोध प्रदर्शन निरन्तर तीव्र होता जा रहा है । इस विरोध प्रदर्शनमें देहली, मुंबई, कर्नाटक सहित कई बडे नगरोंके चिकित्सकोंका साथ मिला । इससे पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड गई है । ममताकी जिदके कारण लोगोंके प्राणोंपर बन आई है; परन्तु ममताकी असंवेदनशीलता बनी हुई है और वो अपनी जिदपर अडी हुई हैं ।
चिकित्सकोंने मांग की है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और दोषियोंके विरुद्घ कडी कार्यवाही हो, साथ ही ममता क्षमा मांगे । यही नहीं, देहली स्थित एम्सके चिकित्सकोंके संगठनने भी ममता शासनको दो दिनका समय दिया है । उन्होंने कहा है कि यदि दो दिनोंमें बंगाल शासनने मांगें स्वीकार नहीं की, तो एम्समें भी अनिश्चितकालीन हडताल की जाएगी ।
गुरुवार, १३ जूनको मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी एसएसकेएम चिकित्सालय पहुंची और उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकोंको ४ घंटेमें कामपर वापस जानेकी चेतावनी दी और कहा कि यदि वो ४ घंटेमें काम पर नहीं लौटते हैं तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी । इसने चिकित्सकोंको भडकानेका कार्य किया । इसीका परिणाम है कि एक ही दिनमें ७०० से अधिक चिकित्सकोंने त्यागपत्र दे दिया ।
“आक्रमण करनेके स्थानपर जिहादियोंकी सुरक्षा कर रही ममता बैनर्जी अब शासनकी योग्यता खो चुकी हैं । केन्द्र इस बिगडती हुई स्थितिको सम्भाले और बंगालमें राष्ट्रपति शासन लगाकर परिस्थितियोंको नियन्त्रण करें; क्योंकि इस आपदाकी स्थितिमें भी ममता वोटबैंककी सोच रही हैं तो ऐसेमें केन्द्रको ही आगे आना होगा ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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