ये कैसा धर्म, ईदकी नमाज पढकर आरम्भ किया सेनापर पथराव, क्या ये होता है धार्मिक त्यौहार ?


जून ४, २०१९

ईदके अवसरपर भी जम्मू-कश्मीरमें शांति नहीं है । बुधवार, ५ जूनको प्रातःकाल ८ बजे ईदकी नमाज पढनेवाले लोगोंने ११ बजे उपद्रवी बनकर सेनापर पत्थरबाजी की ! साथ ही पाकिस्तानका ध्वज भी फहराया ।

समाचारोंके अनुसार उपद्रवियोंकी भीड आतंकी जाकिर मूसाके समर्थनमें सडकोंपर उतरी हुई थी । भीडके हाथमें मूसाके फलक (पोस्टर) है, जिनपर मूसा आर्मी लिखा हुआ है । साथमें इन फलकपर मसूद अजहरका चित्र भी बना हुआ है ।

उल्लेखनीय है जिस जाकिर मूसाके समर्थनमें भीड सेनापर पथराव कर रही है, वो गत माह आतंकियों और सुरक्षाबलके मध्य हुई एक मुठभेडमें मारा गया है । जाकिर ‘ए डबल प्लस’ (A++) श्रेणीका आतंकी था, जिसपर २० लाख रुपएका पुरस्कार रखा गया था ।

सेनापर पत्थरबाजीका समाचार सामाजिक प्रसार मध्यमपर (सोशल मीडियापर) आते ही लोगोंका क्रोध थमनेका नाम नहीं ले रहा है । लोगोंका कहना है कि इसके पश्चात भी लोग इन पत्थरबाजोंको ‘भटके हुए लोग’ और ‘आतंकवादका कोई धर्म नहीं होता’ जैसी बातें करेंगें । कुछ लोग शासनसे शीघ्रातिशीघ्र ‘३७० और ३५ए’को समाप्त करनेकी बात कह रहे हैं, तो कुछ गृह मन्त्री अमित शाहसे आशा लगाए बैठे हैं कि इन पत्थरबाजोंको शीघ्र पाठ पढाया जाएगा ।

ट्विटरपर ही एक व्यक्तिने इस घटनाके बारेमें पढकर लिखा है कि उसका मन करता है कि वो ईद मनाए; परन्तु यह सब देखकर वो ईद कैसे मनाए ? बबलू पाठक नामक व्यक्तिका कहना है कि भाईचारेकी बात सब करते हैं; परन्तु ताली कभी एक हाथसे नहीं बजती है । हम साथकी बात करते हैं, वो पृथकतावादकी बात करता है, फिर बोलते हैं कि हम मुस्लिम विरोधी हैं ।

“अब मोदी शासन स्वतः ही निर्धारित करे कि इन आतंकी समर्थकोंके हाथमें कम्प्यूटर देना है कि नहीं ? कोई भी देश कमसे कम अपनी सेनाको कुछ नहीं होने देता है; परन्तु भारतके शासकगण लज्जाहीन होकर सब मूक दर्शक बने देखते हैं । क्यों इन आतंकी समर्थकोंपर कठोर कार्यवाही नहीं हो रही है, इसक उत्तर शासन दैं ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ


स्रोत : ऑप इण्डिया



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