लोकसभामें पारित हुआ तीन तलाक विधेयक !!


दिसम्बर २८, २०१८

लोकसभामें तीन तलाक विधेयकके पारित होनेके पश्चात मुस्लिम संगठनोंने गुरुवार, २७ दिसम्बरको इसपर मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है । कुछने इसे ‘बहुत भयानक’ बताया तो अन्यने इसका स्वागत किया है ।


‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी)’की कार्यसमितिके सदस्य एस.क्यू.आर. इलियासने कहा कि इस विधेयककी कोई आवश्यकता नहीं थी और इसे आगामी लोकसभा मतदानको ध्यानमें रखकर लाया गया है । उन्होंने कहा, ‘यह बहुत भयानक विधेयक है, जो धर्म प्रकरणको अपराध बना देगा । एक बार पति जेल चला जाएगा तो पत्नियों और बच्चोंकी देखभाल कौन करेगा ? इलियासने कहा कि लैंगिक न्यायके स्थानपर यह विधेयक समुदायके पुरुषों और महिलाओंके लिए दण्ड सिद्ध होगा । उन्होंने शासनसे प्रश्न पूछा, “चार कोटि महिलाओंने याचिकापर हस्ताक्षर कर कहा कि वे विधेयक नहीं चाहतीं, तब ये कौन मुस्लिम महिलाएं हैं जो इसे चाहती हैं ?”

अखिल भारतीय उलेमा परिषदके महासचिव मौलाना महमूद दरयाबादीने कहा कि जब शासनने तीन तलाकको रद्द कर दिया, तब इसपर यहां चर्चा क्यों की जा रही है ? उन्होंने कहा, “शासनको मुस्लिम महिलाओं और बच्चोंके लिए कोषपर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए, जिनके पास अपने पतिके कारावास जानेके पश्चात आयका कोई स्रोत नहीं रहेगा ।”

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलनकी सदस्य जाकिया सोमनने विधेयकका स्वागत किया और हिन्दू विवाह अधिनियमकी भांति मुस्लिम विवाह अधिनियमकी मांग की, जो बहुविवाह और बच्चोंके संरक्षण जैसे प्रकरणसे निपटेगा ।

‘राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू)’ने गुरुवारको लोकसभामें तीन तलाक विधेयक पारित होनेका स्वागत किया । एनसीडब्ल्यूकी अध्यक्ष रेखा शर्माने कहा कि इस विधेयकके अभावमें उन्होंने मुस्लिम महिलाओंकी पीडा देखी है । उन्होंने कहा कि महिला आयोगद्वारा आरम्भ किए गए हस्ताक्षर अभियानमें विधेयकके समर्थनमें लगभग १० सहस्र मुस्लिम महिलाएं सामनें आईं और चाहती थीं कि विधेयक जितनी शीघ्र हो सके पारित हो ।

लोकसभामें तीन तलाक विधेयक पारित होनेको मुस्लिम महिलाओंकी समानता और गरिमा सुनिश्चित करनेकी दिशामें ऐतिहासिक पग बताते देते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाहने गुरुवारको मांग की है कि कांग्रेस दशकोंतक अन्यायके लिए क्षमा मांगे ।

“शासन ‘तीन तलाक विधेयक’के साथ-साथ मुस्लिम बहुविवाहका विधेयक भी पारित करें, यही राष्ट्र हितमें है और मुस्लिम महिलाओंके हितमें भी !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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