विएना, ऑस्ट्रियाकी एक साधिकाकी अनुभूति


अयोग्य एवं तमोगुणी गृह सज्जाके कारण हुई कष्टप्रद अनुभूति

पिछले वर्ष ही जब पूज्या तनुजा मां हमारे घर आईं थीं तो उन्होंने कहा था कि घरके कक्षमें भीतें (दीवारें), चादरें, अलमारियां काले रंगकी नहीं होनी चाहिए । मेरे युवा भाईने हमारे मना करनेपर भी अपने कक्षमें काले और श्वेत रंगसे सभी साज-सज्जा (इंटीरियर्स) करवाई । जब पूज्या मां यूरोप प्रवासके मध्य हमारे यहां कुछ दिवस रुकीं थीं तो उन्होंने मेरे भाईको सब कुछ समझाया और मैं आश्चर्यचकित थी कि मेरे भाईको सब कुछ समझमें आ गया और उसने सबकुछ परिवर्तित करने हेतु हामी भी भर दी ।

वह जबसे उस कक्षके काले और श्वेत ‘इंटीरियर्स’ होनेपर वहां सोने लगा तो उसे स्वयं भी लगा कि वह चिडचिडा हो गया है और उसकी कमरमें वेदना भी रहने लगी है । पूज्या तनुजा मांके जानेके पश्चात जब एक दिवस मैं रात्रिके समय उस कक्षमें सोने गई तो सम्पूर्ण रात्रि मुझे अवसाद होने लगा और मेरे भविष्यके विषयमें उलटे-सीधे विचार आते रहे, इससे मुझे समझमें आया कि मांने जो कहा था उसमें कितनी सत्यता थी ।

– एक साधिका, विएना, ऑस्ट्रिया (९.६.२०१५)



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